फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावधान! बेहद खतरनाक है ये बीमारी, शादी से पहले जरूर करा लें जांच

Wed, 09 May 2018 12:08 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन

अगर बच्चों को थैलेसीमिया जैसी घातक बीमारी से बचाना है तो कुंडली के साथ इसकी डॉक्टरी जांच भी करा लें। दरअसल, यह अनुवांशिक रक्त रोग है और थैलेसिमिक बच्चे को जन्म से उम्र भर रक्त चढ़ाना पड़ता है। लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से आठ मई को थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। 

विज्ञापन


मेडिकल कॉलेज में पिछले साल जून माह में थैलेसीमिया वार्ड की शुरुआत की गई थी। इसमें नि:शुल्क इलाज किया जाता है, जबकि अगर बाहर इलाज कराया जाए तो एक बच्चे का एक साल का खर्च करीब एक लाख रुपये आता है। मेडिकल में इन दिनों 46 मरीजों का इलाज चल रहा है। 

यह है रोग
इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है, जिसके कारण रक्तक्षीणता के लक्षण प्रकट हो जाते हैं। इसकी पहचान छह माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की कमी होने लगती है, जिसके कारण बार-बार बाहरी खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है।
विज्ञापन


अन्य जिलों से आते हैं मरीज
यहां जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उनमें सहारनपुर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, हापुड़ और चंडीगढ़ तक के मरीज हैं।

यह मिलती हैं सुविधाएं
- मरीज को नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है
- गर्भावस्था के दौरान शिशु में थैलेसीमिया की जांच
- खून में आयरन को नियंत्रित कराया जाता है

Trending Videos
विज्ञापन

लक्षण

फाइल फोटो
- बच्चों की त्वचा और नाखूनों में पीलापन आने लगता है।
- आंखें और जीभ भी पीली पड़ने लगती है।
- ऊपरी जबड़े में दोष आ जाता है।
- आंतों में विषमताएं आने लगती हैं।
- दांत निकलने में काफी कठिनाई होने लगती है।
- बच्चे का विकास एकदम रुक जाता है।

ऐसे करें बचाव
- रक्त परीक्षण करवाकर इस रोग की उपस्थिति की पहचान कर लेनी चाहिए।
- शादी करने से पूर्व लड़का एवं लड़की के रक्त का परीक्षण अवश्य करवाएं।
- गर्भधारण के चार महीने के अंदर भ्रूण का परीक्षण कराना चाहिए।

सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है। परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र सिमटकर महज 20 दिन की हो जाती है। इसका सीधा असर शरीर में मौजूद हीमोग्लोबिन पर पड़ता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाने से शरीर दुर्बल हो जाता है और अशक्त होकर हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहता है। मरीज को हर 15 से 30 दिन में खून बदलवाना पड़ता है।- डॉ. नवरत्न, थैलेसीमिया वार्ड इंचार्ज

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें