फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

थानों में नहीं जगह, कहां रखें सीज वाहन   

Sun, 10 Dec 2017 10:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
एनजीटी के आदेश के बाद प्रतिबंध की जद में आए जिले के 43 हजार वाहनों को सीज करने में आरटीओ को पसीना आ रहा है। समस्या ये हैं कि सीज वाहनों का क्या किया जाये। आरटीओ में जगह है नहीं, पुलिस थाने पहले ही लावारिस और मुकदमे वाले वाहनों से भरे पडे़ हैं। ऐसे में प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम ये वाहन शहर में दौड़ रहे हैं।
विज्ञापन


दिल्ली और एनसीआर को हराभरा रखने के लिए एनजीटी ने गत अप्रैल 2015 को एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहन और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया था। आदेश के विरोध में ट्रक यूनियनों ने हड़ताल भी की थी। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने भी इस मामले में राहत पाने के लिए एनजीटी में याचिका डाली थी, लेकिन सभी याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज करते हुए आदेश का अनुपालन कराने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश की जद में मेरठ जनपद के करीब 50 हजार वाहन (डीजल, पेट्रोल) आए थे। शासन ने इन प्रतिबंधित वाहनों को पकड़ने के आदेश दिए थे। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने भी परिवहन विभाग पर दबाव बनाया हुआ है। आरटीओ का प्रवर्तन दस्ता रोजाना 10 से 15 प्रतिबंधित वाहनों को पकड़कर सीज की कार्रवाई करता है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पुलिस थानों में जगह नहीं होने की बात कहकर सीज वाहनों को अपनी सपुर्दगी में लेने से हाथ खड़े कर देती है।

43 हजार प्रतिबंधित वाहन दौड़ रहे शहर में
आरटीओ से मिली जानकारी के अनुसार 15 साल पुराने 5300 वाहन एनओसी लेकर जनपद से बाहर जा चुके हैं। इनमें 4 हजार 87 वाहन डीजल के और 1226 वाहन पेट्रोल वाले हैं। जबकि 9226 डीजल वाहन ऐसे हैं जिनकी एनओसी नहीं ली गई है। इसके अलावा 33,421 पेट्रोल वाहन शहर में दौड़ रहे हैं। दोनों श्रेणियों के करीब 43 हजार प्रतिबंधित वाहन शहरवासियों को न केवल दम घोंट रहे हैं बल्कि एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। 
विज्ञापन


20 हजार से ज्यादा पुराने वाहन बाहरी राज्यों के
जिले में करीब 20 हजार से ज्यादा वाहन ऐसे है जो दूसरे राज्यों में पंजीकृत हैं और इनका संचालन यहां हो रहा है। इसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड के वाहन सबसे ज्यादा है। डीजल ट्रक तो 30 से 40 साल पुराने भी सड़कों पर दौड़ते मिल जाते हैं।  25 साल पहले बंद हो चुकी मेटाडोर नामचीन स्कूलों में अब भी चल रही हैं।

जगह ही नहीं है
आरटीओ टीम सभी वाहनों का जब्त करना शुरू कर दे तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इन वाहनों को आखिर खड़ा कहां किया जाएगा। आरटीओ के पास जगह है नहीं और आरटीओ की टीम वाहन जब्त कर पुलिस को सौंपती है पर पुलिस ऐसे वाहनों को लेने से मना कर रही है। कारण साफ है। पुलिस के पास भी जगह नहीं है। थाने माल मुकदमा वाहनों से पहले ही भरे पडे़ हैं। एक के ऊपर एक गाड़ियां रखी हैं। कई थानों के बाहर तक गाड़ियां खड़ी की गई हैं। ऐसे में पुलिस भी करे तो क्या करे?

रोज कर रहे कार्रवाई
प्रवर्तन टीमें प्रतिबंधित वाहनों को रोजाना सीज कर रही हैं, लेकिन पुलिस थानों में जगह नहीं होने की बात कहकर सीज वाहनों को खड़ा करने से मना कर रही है। इसके लिए एसएसपी को पत्र भेजा गया है। परिवहन विभाग के पास ऐसी कोई जगह नहीं है जहां इन वाहनों को खड़ा किया जा सके।  -डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ

जैसा अफसर चाहेंगे, वैसा ही करेंगे
कुछ थानों में जगह कम है। थानों में जो पुराने वाहन खड़े हैं उन वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया भी लंबी है। थानों में वाहन खड़ा होने की समस्या है। मेडिकल थाने में वाहनों को खड़ा भी किया जाता है। जो भी मामला है, पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को बता दिया जाएगा। जैसा ही उच्च अधिकारियों का आदेश होगा, उसके अनुसार ही पुलिस काम करेगी।
विज्ञापन

 मान सिंह चौहान, एसपी सिटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें