राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘राष्ट्रोदय’ कार्यक्रम में एक अनूठा विश्व रिकॉर्ड बनेगा। रिकॉर्ड की साक्षी बनेगी मेरठ की क्रांतिधरा। क्योंकि इस कार्यक्रम में आरएसएस के ढाई लाख स्वयंसेवक एक से गणवेश में न केवल एकत्र होंगे, बल्कि बड़े मैदान में एक साथ शारीरिक, व्यायाम आदि के बीच सामूहिक गान प्रस्तुत करेंगे। संघ का इससे बड़ा स्वयंसेवक एकत्रीकरण आज तक नहीं हुआ है। रविवार को इस कार्यक्रम के लिए जागृति विहार एक्सटेंशन में भूमि पूजन होगा। इसमें करीब 20 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे।
पुणे में एकत्र हुए थे डेढ़ लाख
संघ का सबसे बड़ा स्वयंसेवक एकत्रीकरण पिछले साल पुणे में हुआ था। 3 जनवरी 2016 को हुए इस आयोजन में एक गणवेश में डेढ़ लाख स्वयंसेवक एक मैदान में एकत्र हुए थे। यदि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मेरठ की बात की जाये तो यहां पर सबसे बड़ा स्वयंसेवक एकत्रीकरण 1998 में गंगानगर में हुआ था, जिसमें मेरठ प्रांत के 51 हजार स्वयंसेवक उपस्थित हुए थे। लेकिन इस बार मेरठ में होने वाला आयोजन संघ का अब तक का सबसे बड़ा स्वयंसेवक एकत्रीकरण होगा।
एक गणवेश में इतनी संख्या होगी रिकॉर्ड
यूं तो कई संगठनों के आयोजनों में ढाई लाख से ज्यादा की संख्या उपस्थित रही है। लेकिन एक ही गणवेश (ड्रेस कोड) में ढाई लाख लोग अभी तक कहीं इकट्ठा नहीं हुए हैं। इसलिए इस दृष्टि से यह एक नया रिकार्ड बनने जा रहा है।
35 फुट ऊंचा बनेगा मंच, लगेगी लिफ्ट
‘राष्ट्रोदय’ का स्वयंसेवक समागम 1300 मीटर लंबे और 900 मीटर चौड़े मैदान में होगा। जिसमें 2.50 लाख स्वयंसेवक जमीन पर बैठेंगे। इन स्वयं सेवकों को आरएसएस के सरसंघ चालक मोहनराव भागवत संबोधित करेेंगे। इसके लिए कार्यक्रम स्थल पर 35 फुट ऊंचा मंच बनाया जा रहा है। इस मंच पर पहुंचने के लिए सीढ़ियां नहीं बल्कि लिफ्ट लगाई जाएगी।
मेरठ सहित इन जनपदों से आऐंगे कार्यकर्ता
‘राष्ट्रोदय’ में संघ की दृष्टि से गठित मेरठ प्रांत के तहत आने वाले मेरठ महानगर और जनपद के साथ ही हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बागपत, बुलंदशहर शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, जेपीनगर, रामपुर जनपद से स्वयं सेवक उपस्थित होंगे। संघ के प्रांत प्रचारक अजय मित्तल के अनुसार अभी तक दो लाख से ज्यादा स्वयं सेवकों का पंजीकरण हो चुका है।
संघे शक्ति का संदेश उद्देश्य
‘राष्ट्रोदय’ के उद्देश्य पर संघ के प्रांत प्रचारक अजय मित्तल ने बताया कि इस कार्यक्रम का जो नाम रखा गया है, वह स्वयं संदेश दे रहा है कि हम राष्ट्र उदय के संदेश को फैलाना चाहते हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में ढाई लाख स्वयं सेवकों की संख्या एकत्र करने के पीछे ‘संगठन में ही शक्ति है’ का संदेश देना है, इससे कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार होगा।
2019 का लक्ष्य साधने की कवायद
पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा की राजनीतिक उर्वरक भूमि के रूप में जानी जाती है। 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में यहीं से लहर शुरू हुई थी। लेकिन पिछले दिनों यह लहर कुछ बदलती नजर आ रही है, जिसे संघ नेतृत्व जान रहा है। ऐसे में कहीं न कहीं इस राष्ट्रोदय को 2019 के लक्ष्य को साधने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।