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यूपी: तालीम नगरी को बदनाम कर रहा आतंकी कनेक्शन, हर वक्त खुफिया एजेंसियों के रडार पर देवबंद

Sun, 24 Feb 2019 01:26 PM IST
Dimple Sirohi अवधेश पचौरी, अमर उजाला, सहारनपुर
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deoband news
आतंकियों के निशाने पर अब पश्चिमी यूपी युवा हैं, जिन्हें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी खुफिया तरीके से ट्रेनिंग भी दी रही है। यह खुलासा खुफिया एजेंसियों की जांच में सामने आया है। वहीं गुरूवार को देवबंद से दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद यह बात और भी पुख्ता हो गई है।

दुनिया भर में तालीम की नगरी के नाम से विख्यात देवबंद को आतंकी कनेक्शन बदनाम कर रहा है। एनआईए, एटीएस द्वारा कोई आतंकी पकड़ा जाता है तो उसका कनेक्शन किसी न किसी रूप में देवबंद से कनेक्शन निकलता रहा है। अब एटीएस ने देवबंद से ही जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी गिरफ्तार किए हैं, जिससे लोग फिर  सवाल उठा रहे है कि आखिर देवबंद में बार बार इस तरह की गतिविधियां क्यों सामने आ रही हैं।
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मदरसा
देवबंद में दारुल उलूम इस्लामिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, जो न केवल हिंदुस्तान बल्कि विदेशों तक विख्यात है। देश दुनिया के युवा यहां आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसके अलावा भी देवबंद में बहुत से मदरसे हैं, जहां से दीनी तालीम दी जाती है। 

 
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इस लिहाज से देवबंद को तालीम की नगरी कहा जाने लगा है। गुरूवार को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक की गिरफ्तारी में भी यह बात उजागर हुई कि वह देवबंद में पढ़ाई के बहाने पहुंचे थे और यहां तालीम की बजाय दहशतगर्दों को तैयार करने में लग गए। 

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मदरसा - फोटो : self
सिर्फ ये ही नहीं अमरोहा से पकड़ा आतंकी मोहम्मद सुहेल हो या 2017 में मुजफ्फरनगर के ग्राम कुटेसरा से आतंकी संगठन अंसारुल्ला बांग्ला का सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला अल मामून। कोलकाता पुलिस द्वारा दिल्ली से गिरफ्तार रजाउल रहमान, लखनऊ के चारबाग स्टेशन से एटीएस द्वारा पकड़े गए इमरान, रजीमुद्दीन, मोहम्मद फिरदौस आदि सभी देवबंद में किसी न किसी रूप में रहे थे। 
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इन दशहतगर्दों ने देवबंद की छवि को खराब कर दिया है।  संदिग्धों के पकड़े जाने के कारण देवबंद हर समय एटीएस, एनआइए और खुफिया विभाग के रडार पर रहता है। कई-कई दिन एटीएस की टीम देवबंद में ही डेरा डाले रहती है। छात्रों एवं संदिग्ध मिलने वाले लोगों से पूछताछ करती रहती है। जिससे बाहर से आने वाले लोगों को भी कई बार परेशानी झेलनी पड़ती है।
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ऑनलाइनफ्रॉड - फोटो : self
आतंकियों के ऑनलाइन दोस्तों का पता लगा रही एटीएस
देवबंद से दबोचे गए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य शाहनवाज और आकिब के ऑनलाइन दोस्तों को तलाशने में एटीएस जुटी हुई है। हालांकि ऐसे दोस्तों का पता लगाना आसान नहीं है, जिनसे दोनों आतंकियों ने स्पेशल चेटिंग ऐप के जरिये चैटिंग की थी। क्योंकि ऑनलाइन एप की चैटिंग का ब्योरा संकलित करने वाला कोई माध्यम अभी पुलिस के पास नहीं है। 
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Social Media
वैसे सोशल साइट्स पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर नजर रखने के लिए चार साल पूर्व मेरठ में लैब की स्थापना की गई थी। तब तक व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसी सोशल साइट प्रचलन में थीं, लेकिन बीते तीन वर्ष में ऐसे विभिन्न एप्लीकेशन भी इजाद हुए, जिनसे ऑनलाइन चेटिंग की जाती है और उनका रिकार्ड भी सुरक्षित नहीं रह पाता है। 

 

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आतंकी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
वहीं, देवबंद से गिरफ्तार किए गए दोनों आतंकियों के बारे में भी यही पता चला कि वह दोनों एंड्रायड फोन से स्पेशल एप्लीकेशन के जरिये लोगों से जुड़ते थे। इसमें वह पश्चिमी यूपी के भी काफी लोगों से संपर्क में रहे होंगे, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल गिरफ्तार दोनों आरोपियों को एटीएस की टीम अपने साथ सहारनपुर से लखनऊ ले गई है। 

 

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आतंकी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
वहां दोनों आरोपियों से इन सभी बिन्दुओं पर पूछताछ होगी कि इन लोगों ने ऑनलाइन किस किससे संबंध स्थापित किए थे। वहीं, आरोपियों द्वारा कई महीने से पश्चिमी यूपी में सक्रिय रहने की बात से बड़े खतरे की तरफ इशारा भी हो रहा है। क्योंकि इस दौरान आतंकियों ने देवबंद में रहने के अलावा पश्चिमी यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर सहित अन्य जनपदों में अपना नेटवर्क खड़ा करने का प्रयास किया होगा। 
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सहारनपुर से दो आतंकी हुए गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
उर्दू बोलते थे तो जल्दी घुल मिल गए
नाज मंजिल छात्रावास में रह रहे शाहनवाज और आकिब कश्मीर के होने के बावजूद देवबंद में रहने में कोई परेशानी नहीं हुई। अधिकांश छात्र आपस में उर्दू भाषा का प्रयोग करते हैं। शाहनवाज और आकिब को उर्दू की अच्छी जानकारी थी। जिस कारण वह अन्य छात्रों से उसी भाषा में बात करते थे। इसलिए अन्य छात्रों के साथ आसानी से घुल मिल गए थे। 

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