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खुलासा : नियमों को तोड़ मरोड़कर देते रहे घोटाले को अंजाम  

Sun, 13 Aug 2017 10:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वायर घोटाले को अंजाम देने के लिए अधिकारियों ने पूरा खेल खेला। जब अवस्थापना निधि की बैठक में यह प्रस्ताव गिर गया तो बाह्य विकास निधि से इस काम को कराने की स्वीकृति प्रदान कर दी। यही नहीं, जो अधिकारी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से बचे तो उनके स्थान पर या तो कार्यवाहक अधिकारी से या फिर किसी दूसरे अधिकारी के साइन करा लिए।
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साइकिल ट्रैक में व्यवधान बनी विद्युत लाइन को शिफ्ट करने के नाम पर एमडीए अधिकारियों ने बड़ा घोटाला किया। काम हुए बिना ही डेढ़ करोड़ का भुगतान कर दिया गया। दोगुनी कीमत पर वायर खरीदा और बिना सत्यापन 18.80 लाख हजार रुपये सुपरविजन चार्ज के रूप में पीवीवीएनएल को दे दिए। कमिश्नर की जांच में खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया। नतीजा कमिश्नर ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार के आरोपी तीन अभियंताओं को अपने कार्यालय में बुलाकर गिरफ्तार करा दिया। कमिश्नर की इस कार्रवाई से एमडीए समेत सभी विभागों में हड़कंप मचा है। वहीं, तत्कालीन एमडीए वीसी समेत 12 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

दरअसल, इस पूरे प्रकरण में अधिकारियों ने जमकर धांधली की। यह तय ही कर लिया था कि यह काम कराना है। यही कारण रहा कि जब यह प्रस्ताव अवस्थापना निधि की बैठक में खारिज कर दिया गया तो इसे बाह्य विकास शुल्क से कराया गया। पहले टेंडरों में खेल हुआ। ए प्लस की शर्त लगाई। इसका भंडाफोड़ हुआ तो उसे हटाया। लेकिन केवल तीन लोगों को ही बुलाया गया और इनमें से एक के साथ सेटिंग कर यह टेंडर कर दिया गया। भुगतान की बारी आई तो यहां तैनात एक सचिव ने इस पर साइन करने से इंकार कर दिया। ऐसे में तत्कालीन वीसी ने पहले अपने साइन भुगतान की फाइल पर किए। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता इस समय विदेश चले गए तो कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता से फाइनल पर साइन करा लिए गए। कुल मिलाकर इस घोटाले को अंजाम देने के लिए सारे यत्न किए गए।
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