पीएफआई से जुड़े हर लिंक को तलाश रही टीमें
मेरठ। पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों का वेस्ट यूपी में नेटवर्क खंगालने के लिए एनआईए और एटीएस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। शहर से देहात तक इस संगठन के लिंक ढूंढकर सदस्यों को चिह्नित करने की कोशिश की जा रही है। सोमवार देर रात भी खरखौदा, सरूरपुर और लिसाड़ीगेट क्षेत्र में दबिश देकर तीन संदिग्ध लोगों को उठाकर उनसे घंटों तक पूछताछ की गई। इनमें से दो लोगों का इस संगठन से कनेक्शन सामने न आने पर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। बाद में उनका शांति भंग में चालान किया गया। वहीं, सीएए-एनआरसी के विरोध में हिंसा करने वालों का रिकॉर्ड खंगालकर भी सुरक्षा एजेंसियां छानबीन कर रही हैं।
पूर्व में गिरफ्तार हुए पीएफआई के सदस्यों ने खुलासा किया था कि उन्होंने केरल के मंजीरी में हथियारों का प्रशिक्षण लिया और गजवा-ए-हिंद सहित अन्य पुस्तकों को भी पढ़ाया गया। उन्होंने बताया था कि उनका इरादा हिंसक घटनाओं को अंजाम देकर यूपी और देश के अन्य हिस्सों में शांति व्यवस्था को बिगाड़ने का था। आरोपियों ने बताया था कि कैराना, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और मेरठ समेत कई जनपदों में उनका नेटवर्क है। तब से इस क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां निगरानी रख रही हैं।
पीएफआई से जुड़ा इनपुट मिलने के बाद सोमवार रात में खरखौदा, सरूरपुर और लिसाड़ीगेट में दबिश देकर तीन संदिग्ध लोगों को उठाया गया। सीओ किठौर अमित कुमार राय के मुताबिक खरखौदा क्षेत्र से अब्दुल बासित को पकड़ा गया था। वह मूल रूप से हापुड़ के गढ़ थानाक्षेत्र के गांव नानपुर का निवासी है, लेकिन पिछले कई वर्षों से लिसाड़ीगेट के फतेहउल्लापुर में पत्नी व बच्चों के साथ रह रहा है। बासित एक दवा कंपनी में एमआर बताया गया है। अभी उसका कोई कनेक्शन नहीं मिला है। जांच के बाद एटीएस ने बासित को खरखौदा पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं, इंस्पेक्टर लिसाड़ीगेट कुलदीप सिंह ने बताया कि फतेहउल्लापुर चौकी के पास से फुरकान नाम के शख्स को भी पकड़ा गया था। फिलहाल उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
वहीं, सीओ सरधना आरपी शाही का कहना कि एटीएस ने संदेह के आधार पर सरूरपुर के खेड़ी कलां निवासी अब्दुल समी को भी पकड़ा था। उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस सुरक्षा एजेंसियों की छानबीन में मदद कर रही है।
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पुराना रिकार्ड भी खंगाला जा रहा
पुलिस के मुताबिक सीएए के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा में मेरठ में 16 मुकदमे दर्ज हुए थे। करीब 116 लोगों की गिरफ्तारी की गई थी। इसमें पीएफआई के कई लोग शामिल थे। एसपी सिटी पीयूष सिंह का कहना कि पुलिस भी पुराना रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि पीएफआई से जुड़े सदस्यों का नेटवर्क तलाशना आसान हो सके।