धूप में फावड़ा चलाते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
जी हां, शिक्षा में आखिर कैसे सुधार हो, जब बच्चों का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी संभालने वाले अध्यापक ही आराम तलब हो जाएं। प्रदेश सरकार की तरफ से परिषदीय स्कूलों में शिक्षा सुधार के लिए खूब प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ऐसे अध्यापक सरकार के प्रयासों को पलीता लगा रहे हैं।
शुक्रवार को गांव लाडो मजरी के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने मीडिया को सूचना दी कि विद्यालय में अध्यापक पढ़ाते नहीं है। अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची, तो कैमरे में कई चौंकाने वाले दृश्य कैद हुए। स्कूल में तैनात अध्यापक अरविंद कुमार बच्चों को पढ़ाने के बजाय कक्षा में टाट पट्टी को बिस्तर बनाकर लेटे थे और बच्चों के बैग को तकिया बनाया हुआ था।
मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते अध्यापक
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मास्टर जी जहां आराम से लेटकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। कुछ बच्चे भी उनके पास बैठे हुए थे। वहीं विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं को फावड़ा व तसला देकर नाले की खुदाई में लगा दिया गया। इससे साफ है कि सरकारी स्कूल में अध्यापकों का ध्यान बच्चों को पढ़ाने में नहीं, बल्कि आराम फरमाने में ज्यादा रहता है।
राकेश कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी, थानाभवन ने बताया कि बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं न कि काम करने के लिए। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो उक्त शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।