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टीचर्स डे: ये शिक्षक कुछ अलग हैं, ज्ञान के सागर से ‘भविष्य’ को दे रहे उड़ान

Wed, 05 Sep 2018 04:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Teachers Day - फोटो : अमर उजाला
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जीवन में शिक्षक का बड़ा महत्व है। बच्चे की पहली शिक्षक उसकी मां होती है। जब बच्चा स्कूल जाता है शिक्षक उसके जीवन को सही दिशा देते हैं। यूं तो छात्रों के लिए सारे शिक्षक-शिक्षिकाएं खास होते हैं, मगर कुछ ऐसे होते हैं जो छात्र का जीवन ही बदल देते हैं। वह सरकार या प्रशासन की तरफ से मिल रहीं सुविधाओं से ऊपर उठकर विद्यार्थियों के लिए तमाम तरह की कोशिशें करते हैं, ताकि उन्हें जिंदगी में एक नए मुकाम तक पहुंचाया जा सके। शिक्षक किसी भी रूप में हो सकता है। मेरठ में कई ऐसे लोग हैं जो गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। शिक्षक दिवस पर हम ऐसे ही लोगों से आपको रूबरू करा रहे हैं।

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नेत्रहीन हैं, छात्रों की जिंदगी कर रहे रोशन

जगदीश लूथरा अध्यापक - फोटो : अमर उजाला
आज के दौर में शिक्षक छात्रों से मोटी फीस वसूलने में पीछे नहीं हैं, ऐसे समय में भी कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो गुरु की परिभाषा को पूर्ण करते हैं। बेगमबाग में रोजमेरी शिक्षण संस्थान के संचालक जगदीश लूथरा सर इस क्रम में शीर्ष नाम हैं। जगदीश लूथरा स्वयं नेत्रहीन हैं, लेकिन पिछले 37 वर्षों से छात्रों को अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं। छात्रों को प्रशासनिक व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं। आज जगदीश सर के पढ़ाए तमाम छात्र विभिन्न प्रशासनिक पदों, पुलिस व सेना में सेवाएं दे रहे हैं। निस्वार्थ भाव से कई छात्रों को निशुल्क शिक्षा देते हैं। 15 जुलाई 1950 को मेरठ में जन्मे जगदीश लूथरा ने एनएएस व मेरठ डिग्री कॉलेज से पढ़ाई की। 1971 में स्वयं शिक्षण कार्य प्रारंभ किया। 1994 में सुभाष रत्न सम्मान, शिक्षक सम्मान, टीपी झुनझुनवाला सम्मान, सहस्त्राब्दी पुरस्कार, शिक्षक गौरव सम्मान, प्रबुद्ध प्राध्यापक सम्मान, एमएन राय अवार्ड, विजय मानव सेवा पुरस्कार आदि से उन्हें नवाजा जा चुके हैं।

सात साल से दे रहे निशुल्क शिक्षा 

रोबिन सिवाच अध्यापक - फोटो : अमर उजाला
अम्हेड़ा गांव निवासी 29 वर्षीय रोबिन सिंह सिवाच करीब सात सालों से निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। इस समय 100 छात्र है जिन्हें निशुल्क पढ़ा रहे हैं। पहले उन्होंने बच्चों को अपने घर पर पढ़ाया। अब गांव में एक जगह नियत की गई है, जहां प्रतिदिन कक्षा लगती है। उनके पढ़ाए छात्र आकाश एयरफोर्स में हैं, जबकि प्रवीण कुमार रेलवे में लोको पायलट हैं। सनी दो साल पहले यूपी पुलिस में चयनित हुए हैं। रोबिन के मुताबिक जब खुद के प्रयत्न से किसी का जीवन समृद्ध बनता है तो मन को सुकून मिलता है।

गरीब बच्चों को दे रहे शिक्षा

नितिन बडोला अध्यापक - फोटो : अमर उजाला
शास्त्रीनगर सेक्टर- 3 निवासी नितिन बडोला बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर में पिछले नौ वर्षों से गणित के सहायक शिक्षक हैं। जब वह इंटरमीडिएट में थे तभी से गरीब बच्चों को पढ़ाने की बात मन में घर कर गई। ग्रेजुएशन में बच्चों को घर में ट्यूशन देना शुरू किया। वह गरीब व सड़क किनारे रहने वाले बच्चों को पढ़ाने लगे। धीरे-धीरे रुचि बढ़ी तो ज्यादा बच्चे आने लगे। नितिन के मुताबिक करीब 15 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। स्कूल में शिक्षण कार्य करने से इस तरह के और भी छात्र पढ़ने आते हैं। जिसमें परिवार के अन्य सदस्य भी मदद करते हैं।

मूक बधिर बच्चों का जीवन संवार रहीं

डॉ. अमिता कौशिक - फोटो : अमर उजाला
कैंट में मिलिट्री अस्पताल के पास मूक बधिर स्कूल की शुरुआत 1959 में हुई थी। उस वक्त यहां तीन बच्चे पढ़ते थे, लेकिन आज यहां पर ढाई सौ से ज्यादा बच्चे हैं। स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. अमिता कौशिक ने बताया कि वे इन बच्चों की देखभाल अपने बच्चों की तरह करती हैं। मूक बधिर बच्चों को न सिर्फ पढ़ाया जाता है बल्कि खेलकूद में भी उनको निपुण कराया जा रहा है। इसकी बदौलत यहां के बच्चे कई नेशनल प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल ला चुके हैं।

जीवन में कर रहे उजियारा 

मेरठ न्यूज
जागृति विहार सेक्टर छह स्थित ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड ऐसा स्कूल हैं जहां पर ब्लाइंड बच्चों को पढ़ाया जाता है। उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब और दूसरे राज्यों के यहां करीब 30 बच्चे पढ़ते हैं। प्रधानाचार्य प्रवीण शर्मा इस स्कूल को चैरिटी से चलाते हैं। स्कूल की कोई फीस नहीं है। नौकरी छोड़ने के बाद प्रवीण शर्मा अपनी पत्नी उपासना शर्मा के साथ इस स्कूल को चलाने में जुटे हैं।

भविष्य संवार रहे डॉ. आई ए खान

आई ए खान अध्यापक - फोटो : अमर उजाला
डॉ. आई ए खान हजारों बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। उन्होंने साल 2012 में ‘बालिका साक्षर सशक्त व आत्मनिर्भर बनाओ’ अभियान के तहत शास्त्रीनगर मेरठ में एफर्ट अकादमी फॉर स्लम गर्ल्स प्रारम्भ की। अनेकों विरोध व स्थानीय लोगों के झगड़े के बाद भी अकादमी कायम हुई। इसमें आठवीं कक्षा तक मान्यता भी मिल गई है। अभी तक लगभग 3000 बालिकाएं अकादमी से लाभान्वित हो चुकी हैं। यूपी बोर्ड की पढ़ाई के साथ-साथ यहां सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, मूर्ति कला, कला, कंप्यूटर की ट्रेनिंग भी बालिकाओं को दी जा रही है। अनेकों बालिकाएं अपनी जीविका भी चला रही हैं।

होनहार छात्राओं की कर रहीं मदद 

मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
खालसा गर्ल्स इंटर कॉलेज प्रधानाचार्या डॉ. मनु भारद्वाज साल 2004 से प्रधानाचार्य हैं। उनके विद्यालय में इस समय 954 छात्राएं हैं। विद्यालय की होनहार छात्राओं को वह निशुल्क शिक्षा और निशुल्क किताबें मुहैया कराती हैं। पहले यह विद्यालय सिर्फ हिंदी मीडियम था, मगर उन्होंने इंग्लिश के महत्व को समझते तमाम प्रयास करके विद्यालय में इंग्लिश मीडियम में भी पढ़ाई शुरू कराई है। 

बच्चों को दिया स्मार्ट क्लास का तोहफा

मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
प्राइमरी पाठशाला नवीन गेट की प्रधानाध्यापिका मनीषा जैन ने शिक्षक दिवस पर बच्चों को स्मार्ट क्लास का तोहफा दिया है। वह विद्यालय की दशा सुधारने में जुटी हैं। उनके विद्यालय में शौचालय नहीं था। प्रयास के बाद भी बजट नहीं मिला। उन्होंने अपने खर्चे से शौचालय बनवाया। मिड-डे मील के टूटे बर्तनों को बदलकर नए बर्तन लाए गए। उन्होंने अपने घर की एलईडी स्कूल को दान कर दी है। अब इसके माध्यम से बच्चों को स्मार्ट क्लास दी जाएगी। मनीषा शहर के सुपरटेक में रहती हैं। पति मुकुल जैन प्राइवेट फर्म में एकाउंट आफिसर हैं। मनीषा कहती हैं कि जिस तरह हम अपने बच्चों को बेहतर माहौल में पढ़ाना चाहते हैं वैसे ही हम चाहते हैं कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी अच्छी सुविधाएं मिलें।

मैम नहीं ‘मां’ हैं डॉ. नीरा तोमर

नीरा तोमर अध्यापक - फोटो : अमर उजाला
डॉ. मल्हू सिंह आर्य कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. नीरा तोमर साल 2002 से प्रधानाचार्या हैं। उनके यहां 1500 छात्राएं पढ़ती हैं। जब वह विद्यालय में आई थीं, तब यहां 700 छात्राएं थीं। छात्राएं उन्हें मैम नहीं ‘मां’ कहने लगी हैं। वह यह अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं। उन्होंने अपनी सास भूरो देवी के नाम से विद्यालय में प्रोत्साहन राशि के रूप में होनहार छात्राओं को 2100 रुपये देने शुरू किए हैं। वह हर माह काफी लड़कियों की फीस अपनी सैलरी से देती हैं। उनका कहना है कि वह नहीं चाहती, कोई छात्रा पैसों के अभाव में पढ़ाई छोड़ दे।

मां का सपना पूरा कर रहे मधुसूदन

मधुसूदन कौशिक - फोटो : अमर उजाला
शहर के जूनियर हाईस्कूल कृष्णापुरी के इंचार्ज प्रधानाध्यापक मधुसूदन कौशिक ने 2016 में जब स्कूल में चार्ज लिया तो यहां केवल 28 छात्र थे। हालत बहुत खराब थी। बच्चों के मिड-डे मील के बर्तन टूटे थे। बिजली जाने पर बच्चों का गर्मी से बुरा हाल था। उन्होंने अपने निजी खर्च से बर्तनों की व्यवस्था की। इनवर्टर लगवाया अब बिजली जाने पर क्लास में पंखे चलते रहते हैं। अपने संसाधनों सेे स्कूल में स्मार्ट क्लास शुरू की। उनका और स्टाफ का ही प्रयास रहा कि मंडलायुक्त ने स्कूल के बच्चों को खेल की किट प्रदान की। स्कूल में कैरम, क्रिकेट, फुटबाल आदि खेल का काफी सामान है। स्कूल में लाइब्रेरी के अलावा साइंस लैब है। जहां मधुसूदन खुद बच्चों को पढ़ाते हैं। मधुसूदन नगर शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना था कि 2010 में उनकी माता धर्मवती शर्मा इसी विद्यालय से रिटायर हुई थीं। उनकी भी इच्छा है कि उनका ये स्कूल आगे बढ़े उनकी राह पर चलकर वे भी इसके छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए प्रयासरत हैं। अब उनका प्रयास स्कूल के जर्जर भवन को ठीक कराना है। 

परिजनों ने किया विरोध, फिर भी दे रहे शिक्षा 

मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
मवाना के गांव मीवा निवासी मो. शौकीन कसेरूबक्सर में एक संस्था के माध्यम से गरीब, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शौकीन के मुताबिक करीब एक साल पहले उन्होंने जब यह निशुल्क शिक्षण का कार्य शुरू किया तो परिजनों का भी विरोध झेलना पड़ा। दिव्यांग शौकीन के पास इस समय करीब 40 बच्चे पढ़ रहे हैं। दो बैच में बच्चों को पढ़ाते हैं। करीब 14 लड़कियां भी पढ़ रही हैं।

फ्री कराया दाखिला 

मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
शास्त्रीनगर सेक्टर 9 निवासी निशा सक्सेना परिवार के साथ रहती हैं। निशा के मुताबिक वह पहले ड्राइंग,पेंटिंग की क्लास देती थीं। पर एक हादसे के बाद उन्होंने यह काम छोड़ दिया। अब गरीब बच्चों को पढ़ा रही हैं। इस समय 20 से अधिक बच्चे हैं जिसमें से करीब 10 बच्चों को स्कूलों में एडमिशन कराया है। कुछ बच्चों को घर में शिक्षा दे रही हैं।  
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जीवन जीने का तरीका सिखा रहे डॉ.वीर बहादुर

मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
केके इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ.वीर बहादुर सिंह पढ़ाई के साथ साथ अनुशासन रखना उनकी सबसे बड़ी खासियत है। सही मार्गदर्शन देना भी वह अपना काम समझते हैं। एक जुलाई 2009 से वह यहां प्रिंसिपल हैं। उनके पास बीएड, एमएड और पीएचडी आदि डिग्रियां हैं। 35 तरह के सम्मान और प्रशस्ति पत्र पा चुके हैं। राजस्थान, मुजफ्फरनगर, उत्तराखंड, मेरठ में शिक्षा से जुड़े 21 विभागों में अलग-अलग पद पर रहने का अनुभव है। उत्तर प्रदेश स्काउड गाइड के आजीवन सदस्य हैं। उनके विद्यालय का पिछले पांच साल से 100 प्रतिशत रिजल्ट रहा है। 33 साल की सर्विस हो चुकी है, जिनमें वह 19 साल से प्रधानाचार्य हैं। इनके स्काउड गाइड को राज्यपाल और राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। 


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