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Meerut: टैक्स रिफंड घोटाले का भंडाफोड़, कर्मचारियों के आधार कार्ड में पते बदलकर खोल देता था फर्जी फर्म

Mon, 15 May 2023 04:14 PM IST
Dimple Sirohi विनीत तोमर, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में टैक्स रिफंड घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। टैक्स माफिया कपड़े और घड़ियों का माल निर्यात करता था। आइडी कार्ड के तौर पर उनसे आधार कार्ड और पेन कार्ड ले लेता था।
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आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली, यूपी और हरियाणा में टैक्स रिफंड घोटाले के मामले में पकड़े गए निर्यातक रविंद्र कुमार शर्मा से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। टैक्स माफिया कपड़े और घड़ियों का माल निर्यात करता था। 

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इसके लिए उसे कर्मचारियों की जरूरत होती थी। वह बिहार और पूर्वी यूपी के ऐसे लोगों को अपने यहां नौकरी देता था जो कम पढ़े-लिखे हो और ज्यादा सवाल-जवाब न करें। आइडी कार्ड के तौर पर उनसे आधार कार्ड और पेन कार्ड ले लेता था। इसके बाद वह कर्मचारियों का रेंट एग्रीमेंट बनवा लेता था, जिसके बाद रेंट एग्रीमेंट दिखाकर उनके आधार कार्ड में पता बदल देता था।

पता भी ऐसा डालता था जो किसी को न मिले। आधार कार्ड में पता बदलने के बाद वह उन लोगों के नाम पर फर्म खोलता था। कर्मचारी इस बात से अंजान रहते थे। सेंट्रल जीएसटी के अधिकारियों के अनुसार, वह अभी तक 50 से अधिक फर्म खोलकर सरकार से कई करोड़ टैक्स रिफंड ले चुका है। 
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जिन्हें माल किया निर्यात, वह भी जांच के दायरे में
सेंट्रल जीएसटी की टीम अब उनकी भी जानकारी जुटा रही है जिनके यहां पर माफिया ने माल एक्सपोर्ट (निर्यात) किया है। क्योंकि कम माल एक्सपोर्ट होने के बावजूद ज्यादा के बिल कैसे बनाए गए। यह पता किया जा रहा है कि माफिया ने खुद फर्जी बिल बनाए या फिर जिन लोगों के यहां एक्सपोर्ट किया उनकी कोई मिलीभगत है। ऐसे में उन्हें भी जांच के दायरे में रखा गया है। 

इस तरह मिलता है सरकार से टैक्स रिफंड 
यदि किसी फर्म मालिक ने एक लाख का माल एक्सपोर्ट किया है और उस पर 28 प्रतिशत ड्यूटी लगती है तो सरकार की तरफ से उसे 28 हजार रुपये टैक्स रिफंड के नाम पर मिल जाते हैं।

फर्जीवाड़ा ऐसे किया गया कि फर्म ने भले ही एक लाख के माल का एक्सपोर्ट किया हो, लेकिन सरकार से टैक्स रिफंड लेने के लिए 10 लाख से अधिक का माल एक्सपोर्ट दिखाया गया और उसका बिल लगाकर टैक्स रिफंड ले लिया गया।
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ऐसे हुआ टैक्स रिफंड घोटाले का खुलासा 
ये खेल कई सालों से चल रहा था, लेकिन एक चूक के कारण वह हत्थे चढ़ गया। वह कर्मचारियों के आधार कार्ड में तो पते बदल देता था, लेकिन पेन कार्ड में नहीं बदल सका।

जब टीम ने जांच में उन कर्मचारियों से पूछताछ की जिनके पेन कार्ड उन आधार कार्ड के साथ लगे हुए थे तो पचा चला कि कर्मचारियों ने आधार कार्ड का पता कभी बदला ही नहीं, तब जाकर जीएसटी की टीम को शक हुआ। टीम ने और तथ्य जुटाए और तब माफिया पर शिकंजा कसा गया। 

करोड़ों रुपये टैक्स रिफंड लेने के बाद बंद कर देता था फर्म 
अधिकारियों के अनुसार, पकड़ा गया माफिया इतना शातिर है कि वह एक फर्म से शुरुआत में कम एक्सपोर्ट करता था। कुछ समय बाद ज्यादा माल का एक्सपोर्ट दिखाकर करोड़ों रुपये टैक्स रिफंड ले लेता था। मोटा टैक्स रिफंड लेने के बाद वह उस फर्म को बंद कर देता था। बंद होने के बाद फर्म इसलिए ट्रेस नहीं हो पाती थी कि उनके आधार कार्ड में जो पता दिखाया गया है वह फर्जी रहता था।
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