जिन्हें माल किया निर्यात, वह भी जांच के दायरे में
सेंट्रल जीएसटी की टीम अब उनकी भी जानकारी जुटा रही है जिनके यहां पर माफिया ने माल एक्सपोर्ट (निर्यात) किया है। क्योंकि कम माल एक्सपोर्ट होने के बावजूद ज्यादा के बिल कैसे बनाए गए। यह पता किया जा रहा है कि माफिया ने खुद फर्जी बिल बनाए या फिर जिन लोगों के यहां एक्सपोर्ट किया उनकी कोई मिलीभगत है। ऐसे में उन्हें भी जांच के दायरे में रखा गया है।
इस तरह मिलता है सरकार से टैक्स रिफंड
यदि किसी फर्म मालिक ने एक लाख का माल एक्सपोर्ट किया है और उस पर 28 प्रतिशत ड्यूटी लगती है तो सरकार की तरफ से उसे 28 हजार रुपये टैक्स रिफंड के नाम पर मिल जाते हैं।
फर्जीवाड़ा ऐसे किया गया कि फर्म ने भले ही एक लाख के माल का एक्सपोर्ट किया हो, लेकिन सरकार से टैक्स रिफंड लेने के लिए 10 लाख से अधिक का माल एक्सपोर्ट दिखाया गया और उसका बिल लगाकर टैक्स रिफंड ले लिया गया।
ऐसे हुआ टैक्स रिफंड घोटाले का खुलासा
ये खेल कई सालों से चल रहा था, लेकिन एक चूक के कारण वह हत्थे चढ़ गया। वह कर्मचारियों के आधार कार्ड में तो पते बदल देता था, लेकिन पेन कार्ड में नहीं बदल सका।
जब टीम ने जांच में उन कर्मचारियों से पूछताछ की जिनके पेन कार्ड उन आधार कार्ड के साथ लगे हुए थे तो पचा चला कि कर्मचारियों ने आधार कार्ड का पता कभी बदला ही नहीं, तब जाकर जीएसटी की टीम को शक हुआ। टीम ने और तथ्य जुटाए और तब माफिया पर शिकंजा कसा गया।
करोड़ों रुपये टैक्स रिफंड लेने के बाद बंद कर देता था फर्म
अधिकारियों के अनुसार, पकड़ा गया माफिया इतना शातिर है कि वह एक फर्म से शुरुआत में कम एक्सपोर्ट करता था। कुछ समय बाद ज्यादा माल का एक्सपोर्ट दिखाकर करोड़ों रुपये टैक्स रिफंड ले लेता था। मोटा टैक्स रिफंड लेने के बाद वह उस फर्म को बंद कर देता था। बंद होने के बाद फर्म इसलिए ट्रेस नहीं हो पाती थी कि उनके आधार कार्ड में जो पता दिखाया गया है वह फर्जी रहता था।