मेरठ। श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर फूलबाग कॉलोनी में मुनिश्री अनुकरण सागर और मुनिश्री अनुशासन सागर ने श्रीजी का अभिषेक किया। इसके बाद शांतिधारा हुई। मुनिश्री अनुकरण सागर ने कहा कि संत के विचारों को हृदय में उतारना चाहिए।
उन्होंने एक प्रसंग में कहा कि राजा के दरबार में एक गरीब शिल्पकार तीन मूर्तियां लेकर पहुंचा। उसने राजा से कहा कि यह तीन मूर्ति उसने बनाई हैं। मुझे इनके उचित दाम दे दीजिए। राजा ने कहा कि आप इनका उचित दाम बता दीजिए ताकि मैं इन्हें खरीद सकूं। इसके बाद शिल्पकार ने एक मूर्ति के कान में सलाई डाली, वह दूसरे कान से बाहर निकल गई। दूसरी मूर्ति के कान में सलाई डाली तो वह मुंह से बाहर निकल गई। तीसरी मूर्ति के कान में सलाई डाली तो वह पेट में समा गई। इसके बाद कहा कि महाराज पहली मूर्ति सिर्फ 500 रुपये की है। दूसरी 1000 रुपये की और तीसरी मूर्ति अनमोल है।
मुनिश्री ने कहा कि इन मूर्तियों की तरह श्रोता भी तीन प्रकार के होते हैं। एक प्रवचन सुनकर दूसरे कान से बाहर निकालने वाला, दूसरा प्रवचन सुनकर दूसरों को उस बारे में बताने वाला और तीसरा श्रोता विचारों को हृदय में उतारकर अपना कल्याण करने वाला होता है। हमें भी ऐसा ही श्रोता बनना चाहिए।
दोपहर के सत्र में भक्तों ने अपनी शंकाओं का समाधान कराया। संध्या सत्र में आनंद यात्रा के तहत श्रोताओं से प्रश्न उत्तर कर उनकी जिज्ञासाओं को दूर किया गया। बाद में भक्तों ने सामूहिक आरती की। कार्यक्रम में नवीन जैन, अतुल, राजेंद्र, विनोद, विनय, हेमंत, हर्ष, प्रमोद, पीयूष, अनुज सहित अन्य रहे।