मानव चेतना जाग्रति मंच के तत्वावधान में रामलीला कमेटी भवन सदर में रविवार को आध्यात्मिक आयोजन हुआ। इसमें स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि स्वयं को जाने बिना परमात्म तत्व को जानना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि भौतिकता की दौड़ में माया जाल में फंसकर मनुष्य छटपटाता रहता है, लेकिन सही राह, दिशा के अभाव में परम लक्ष्य से वंचित रह जाता है। कार्यक्रम के संचालक राजकुमार शर्मा राज ने कहा कि स्वयं को साधने, जानने और पहचान के लिए सही शिक्षा व पद्धति को विकसित करने के उद्देश्य से आत्मसाध केंद्र कार्यरत है। मनुष्य ही प्रकृति से परमात्मा की ओर का रास्ता सहजता से प्राप्त कर सकता है। कार्यक्रम की व्यवस्था में एसके शर्मा, सतीश शर्मा, आशा गर्ग, भीम सिंह मीणा, वीना शर्मा, संकल्प शर्मा, हिमांशु भारद्वाज आदि सहयोग रहा।
दुख से परे होना ही मानव का लक्ष्य है
मेरठ। मानव सुख-शांति की शक्ति के लिए प्रयत्नशील है। विचार शैली में दोष के कारण उसे सफलता नहीं मिल रही है। लोगों ने अपनी जीवन धारा को अलग दिशा दे दी है। यही उनके दुखों का कारण है।
यह संदेश स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने श्री रामलीला कमेटी भैसाली मैदान सभागार में दिया। उन्होंने कहा कि ऋषि मुनियों के देश भारत में आज मानव का दर्शन मुश्किल हो गया है। दुख से परे होना ही मानव जीवन का लक्ष्य है। यह अंतर चेतना जागरण से ही संभव है। साध्वी सुमन शुक्ला ने भजन गुरुदेव तुमने मुझे बहुत कुछ दिया है गाया। डीएस मीना ने कहा कि हम अपने प्रभु से कुछ न कुछ मांगते हैं। बीना ने कहा कि जब से मैं गुरुजी की शरण में आई हूं। मुझे परिवार में जीना आ गया है। इस अवसर पर श्याम नारायण मिश्रा ने भी विचार रखे।