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Meerut News: विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करेगा भारतीय महासागर का सतत उपयोग

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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में भारतीय महासागर क्षेत्र की सामरिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और तकनीकी संभावनाओं पर ऑनलाइन विचार-विमर्श आयोजित हुआ। कुलपति संगीता शुक्ला ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। देश-विदेश के विशेषज्ञों ने सहयोग, नवाचार और सतत विकास को भारत की प्रगति का आधार बताया।
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कुलपति संगीता शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं। भारतीय महासागर आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने अकादमिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के समन्वय से समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर जोर दिया, जो विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करेगा। प्रफुल तलेरा ने भारतीय महासागर को वैश्विक व्यापार और सुरक्षा का केंद्र बताया। गुलशन रतन ने ब्लू इकोनॉमी की अवधारणा पर प्रकाश डाला। कमांडर अर्नब दास ने जल के भीतर के क्षेत्र पर चर्चा करते हुए समुद्री सुरक्षा और डिजिटल परिवर्तन की अहमियत समझाई। मनोहर राय ने समुद्री जल प्रदूषण पर चिंता जताई। संदीप ने मछुआरा समुदाय की चुनौतियों को उजागर किया। दिलीप परगांवकर ने आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामरिक सुरक्षा के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
पॉलिमर सामग्री के उपयोग पर प्रकाश डाला
रिसर्च डायरेक्टर बीरपाल सिंह ने समुद्री जल से हाइड्रोजन उत्पादन (जल विखंडन) की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह तकनीक ग्रीन हाइड्रोजन के माध्यम से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकती है। हालांकि, क्लोरीन उत्सर्जन नियंत्रण के लिए अतिरिक्त शोध आवश्यक है। कार्यक्रम संयोजक डीन टेक्नोलॉजी आरके सोनी ने पॉलिमर सामग्री के उपयोग पर प्रकाश डाला। यह सामग्री समुद्री संरचनाओं, जहाज निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण में उपयोगी है। कार्यक्रम में प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. योगेंद्र गौतम, डॉ. नाजिया तरन्नुम, इंजी. प्रवीण कुमार सहित कई विद्वान उपस्थित रहे।
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