गलतफहमी
-नसबंदी कराने से शारीरिक कमजोरी आती है
-भूख कम लगती है
-सिर्फ सर्दियों में करवानी चाहिए
हकीकत
-शारीरिक कमजोरी नहीं आती है
-भूख और वजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है
महिलाओं, पुरुषों से ज्यादा जागरूक
परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डाॅ. विश्वास चौधरी ने बताया कि महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा जागरूक हैं। नसबंदी के अलावा बच्चों में अंतर रखने की विधि पीपीआईयूसीडी को अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक 9526 महिलाओं ने अपनाया। वर्ष 2021-22 में 8243 महिलाओं ने अपनाया था। इस साल अभी तक 12057 महिलाओं ने अपनाया है। अब तक 22270 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन को अपनाया है।
-स्वास्थ्य विभाग लक्ष्य नहीं कर पा रहा पूरा : स्वास्थ्य विभाग अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। मेरठ में हर साल का लक्ष्य 16 हजार नसबंदी का है, मगर यह किसी भी साल पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए लाभार्थी को तीन हजार रुपये और प्रेरक को चार सौ रुपये दिए जाते हैं। पहले यह क्रमश: दो हजार रुपये और तीन सौ रुपये दिए जाते थे।
-जागरूकता का अभाव है वजह : सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि महिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज, मवाना, सरधना और दौराला सीएचसी पर नसबंदी कराई जाती है। इसके लिए जागरूकता अभियान भी समय समय पर चलाए जाते हैं, मगर पुरुषों में इसे लेकर उत्साह नहीं है।