देवबंद (सहारनपुर)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर दिए बयान की देवबंदी उलमा ने आलोचना की है। उनका कहना है कि जब मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है तो फिर ऐसी बयानबाजी का क्या मतलब है। कोर्ट इसका संज्ञान लेकर ऐसे लोगों पर कार्रवाई करे।
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कर्नाटक में विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण होकर रहेगा। हम मंजिल के बेहद करीब हैं और हमें ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है।
भागवत के इस बयान पर मदरसा हकीमुल इस्लाम के मोहतमिम मौलाना कारी रहीमुद्दीन ने कहा कि जब चुनाव का समय नजदीक आता है तो बीजेपी और आरएसएस के लोग इस तरह फिजूल की बयानबाजी करने लगते हैं ताकि चुनाव में वे इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन फैसले का इंतजार करना चाहिए। मुसलमान खामोश होकर कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
कारी रहीमुद्दीन ने कहा कि न्यायालय को गलत बयानबाजी करने वाले लोगों का संज्ञान लेकर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि देश का माहौल खराब होने से बचाया जा सके। मौलाना अब्दुल रहमान का कहना है कि अयोध्या मसले में सबकी निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। मुसलमानों की ओर से इस मामले की पैरवी कर रहे लोग साफ तौर पर कह चुके हैं कि कोर्ट इसमें जो भी फैसला देगा, वह उसका सम्मान करेंगे। बीजेपी और आरएसएस जैसे संगठन गलत बयानबाजी कर रहे हैं।
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