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देवबंदी उलेमा की टिप्पणी से आगबबूला हुई फरहा फैज, 'शरई अदालत' को लेकर दिया बड़ा बयान

Tue, 04 Sep 2018 04:38 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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फाइल फोटो
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सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज सोमवार को फिर से मीडिया के सामने आईं और देवबंदी उलमा द्वारा की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि वह अपना काम अच्छे से कर रही हैं इसलिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धी की जरुरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने शरई अदालत नाम पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि उन्हें इसके काम से नहीं बल्कि नाम से दिक्कत है। दारुलकजा का नाम मिडिएशन सेंटर (समझौता केंद्र) होना चाहिए। अदालत नाम रखने का अधिकार किसी भी गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) को नहीं है। 

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सहारनपुर में रणखंडी रोड पर हुई प्रेस कांफ्रेंस में फरहा फैज ने कहा कि दारुलकजा (शरई अदालत) जिस तरह का काम करती हैं उसके अनुसार उसका नाम मिडिएशन सेंटर रखा जाना चाहिए। क्योंकि एक देश और एक संविधान में दो-दो अदालतें नहीं हो सकतीं। तीन तलाक, बहुविवाह और ट्रिपल तलाक का विरोध करते हुए फरहा फैज ने कहा कि जिस तरह हिंदू और इसाई मैरिज एक्ट बना हुआ है उसी तरह मुस्लिम मैरिज एक्ट का होना भी जरुरी है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम बच्चें मदरसों तक सीमित न रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर मुख्यधारा से जुड़े इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि देश में ऐसा विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए जहां धार्मिक शिक्षा के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाए। एक सवाल पर फरहा फैज ने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। बल्कि उनका मकसद मजबूती के साथ महिलाओं के हकों की लड़ाई लडना है। जिसके लिए वह लगातार काम कर रही हैं। इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष गजराज सिंह राणा, विनोद वर्मा, ठा. सुरेंद्रपाल सिंह आदि मौजूद रहे।

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उल्लेखनीय है कि फरहा फैज ने रविवार को भी मीडिया के सामने अपनी बात रखी थी। तीन तलाक की मुख्य याचिकाकर्ता व सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने कहा कि तीन तलाक बिल को लेकर मुस्लिम समुदाय को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन कुछ कट्टरपंथी नहीं चाहते कि मुस्लिम समाज उनके शिकंजे से आजाद हो। वो चाहते हैं कि मुस्लिम समुदाय आंख और कान बंद कर उनका गुलाम बना रहे। 

रविवार को देवबंद पहुंची फरहा फैज भाजपा नगर अध्यक्ष गजराज राणा के आवास पर पत्रकारों से रूबरू हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी तीन तलाक बिल में रोड़ा हैं, उन्हें लगता है कि अगर तीन तलाक पर कानून लागू हो गया तो उनका वजूद खत्म हो जाएगा। इसलिए वह मुस्लिम समाज को गुमराह कर रहे हैं। देश पर जबरन शरीयत थोपने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। फरहा फैज ने कहा कि इस कानून को दारुल उलूम व मुस्लिम संगठन नहीं मानेंगे। क्योंकि इनके पास तलाक, निकाह, हलाला बहुविवाह के फतवों के अलावा कुछ नहीं है। अगर तीन तलाक पर कानून बन जाएगा तो इन लोगों के पास कुछ बचेगा ही नहीं और इनकी दुकानें बंद हो जाएंगी। उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बोर्ड केवल दारुल उलूम का एक प्रोडक्ट मात्र है।
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वहीं दारुल उलूम पर आरोप लगाते हुए फरहा ने कहा कि उसकी विचारधारा के मदरसे आतंक की शिक्षा देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने ऊपर ट्रेन में हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि दारुल उलूम छात्रों ने ही उन पर हमला किया था। उनकी याचिका के बाद ही दारुल उलूम को नोटिस भेजा गया था। जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलता वह इस लड़ाई को जारी रखेंगी। 

पगड़ी पहन राजपूताना शान को कायम रखा, सिर ढककर इस्लाम की परंपरा निभाई 
भाजपाइयों द्वारा पगड़ी पहनाए जाने पर फरहा फैज ने कहा कि उनके वंशज राजपूत चौहान थे। इसलिए पगड़ी पहनकर राजपूताना शान को कायम रखा और सिर ढक कर इस्लाम धर्म की परंपरा को भी निभाया। क्योंकि इस्लाम में सिर ढकना जरूरी है। इस मौके पर राकेश पुंडीर, विकास पुंडीर, प्रवीण गोयल, कर्नल राजीव, राहुल त्यागी, स्वामी दर्शन भारती, राकेश पुंडीर, ठा. जसवंत राणा आदि मौजूद रहे।

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