मेरठ। थिनर, सॉल्वेंट और बेंजीन से नकली पेट्रोल-डीजल बनाने के खेल में आपूर्ति विभाग की भूमिका की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। आपूर्ति विभाग पर शासन द्वारा बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है। पुलिस का कहना है कि एसआईटी ने सारे दस्तावेज जुटाए हैं।
परतापुर और टीपीनगर में नकली पेट्रोल-डीजल बनाने का खुलासा कर तेल माफिया राजीव जैन, प्रदीप गुप्ता समेत 10 लोग गिरफ्तार कर 2.20 लाख लीटर नकली तेल बरामद किया गया था। नकली तेल पेट्रोल पंपों पर सप्लाई किया जा रहा था। एसआईटी की जांच में तेल माफियाओं की पोल खुलने लगी तो आपूर्ति विभाग की भूमिका संदिग्ध मिली है। थिनर, सॉल्वेंट और बेंजीन में में लाल रंग का पाउडर मिलाकर नकली तेल बनाया जा रहा था। राजीव जैन और प्रदीप गुप्ता के पास केमिकल का लाइसेंस था।
वहीं दोनों फैक्टरियों की जांच करने एक बार भी आपूर्ति विभाग नहीं गया। पुलिस ने ऐसे कई सुबूत तलाशने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी है। जिसमें आपूर्ति विभाग पर कार्रवाई होनी तय है। पुलिस ने सोमवार को तेल माफियाओं के बैंक खाते भी सीज कराए थे। काले तेल से कितना पैसा कमाया है, इसकी जांच करने के लिए बैंक से खातों का रिकॉर्ड मांगा है। पुलिस का दावा कि तेल माफियाओं के खाते में जिला आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों को कितना पैसा गया, इसकी भी जांच चल रही है।
सिस्टम की खामोशी
रोजाना 60 हजार नकली तेल तैयार कर पेट्रोल पंपों पर सप्लाई होता था। पेट्रोल पंप मालिकों को बचाने का प्रयास चल रहा है। पुलिस व प्रशासन इसकी रिपोर्ट शासन को भेज चुके हैं। जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण में मजिस्ट्रेट जांच भी तय कर दी है जिसे 6 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी है।
केमिकल कंपनी को नोटिस
एसआईटी प्रभारी अविनाश पांडेय का कहना कि राजीव जैन व प्रदीप गुप्ता की फैक्टरी में अलीगढ़ स्थित पराग और वैष्णो नाम की कंपनी से थिनर, सॉल्वेंट आता था। केमिकल फैक्टरी को मेरठ पुलिस ने नोटिस भेजा है। राजीव और प्रदीप के फैक्टरी में कितना केमिकल जाता था और वहां से कितना पैसा आता है, इसकी जानकारी जुटाने के लिए अलीगढ़ की कंपनी को नोटिस दिया है।
मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक
नकली तेल प्रकरण की गूंज शासन तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार मंगलवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के साथ ही प्रमुख सचिव के साथ अन्य आला अधिकारियों की इस पूरे प्रकरण पर बैठक हुई। जिसमें अब तक प्राप्त हुए इनपुट के आधार पर कार्रवाई तय की गई। सूत्रों की मानें तो जनपद स्तरीय एक अधिकारी के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई इस मामले में तय की गई है।