आपूर्ति विभाग के अनुसार 20 फरवरी 2015 को सरधना तहसील के गांव रार्धना स्थित मै. भारद्वाज फिलिंग सेंटर से पेट्रोल और डीजल के नमूने लिए थे। इसमें तीन साल बाद जांच रिपोर्ट प्राप्त हुईऱ्, जिसमें पेट्रोल तो सही पाया गया। लेकिन डीजल में केरोसिन का मिश्रण मिला। इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी गयी थी। लेकिन दर्ज रिपोर्ट को दबा दिया गया।
इसके अलावा मै. हस्तिनापुर फिलिंग स्टेशन से 21 अप्रैल 2015 को पेट्रोल और डीजल के नमूने लिए गए। दोनों का परिणाम चार दिन बाद मिल गया। ये दोनों नमूने सही पाए गए। वहीं मैं सरगोधा ऑटो फ्यूल से 24 अप्रैल 2015 को नमूने लिए गए। लेकिन आज तक इसकी जांच रिपोर्ट ही प्राप्त नहीं हुई।
मै. राकेश सर्विस स्टेशन से 18 अप्रैल 2016 को तीन कंटेनरों के अलग-अलग नमूने लिए गए थे। सभी की जांच में हाई स्पीड डीजल पाया गया। इसके अलावा मै. राकेश सर्विस स्टेशन से ही 2 मई 2017 को नमूने लिए गए। लेकिन आज तक इसकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
आपूर्ति विभाग जो नमूने जांच के लिए भेजता है, आरटीआई के अनुसार उसकी रिपोर्ट कई-कई साल में प्राप्त होती है। इस पूरी कार्यप्रणाली पर आपूर्ति विभाग सवालों के घेरे में है। जब जांच रिपोर्ट में ही इतना समय लगेगा तो कार्रवाई कैसे होगी? यह सब आपूर्ति विभाग की लापरवाही नही बल्कि साठगांठ के कारण हो रहा है।