शनिवार को देर शाम शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। वहीं रविवार की सुबह शव के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे कि अंधविश्वास के चलते रिश्तेदार के कहने पर फिर से इलाज व झाड़ फूंक करने वाले तांत्रिक को बुला लिया गया। तांत्रिक के आने की खबर गांव में फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण शमसान घाट पर तंत्र विद्या देखने के लिए पहुंच गए।
तांत्रिक ने गांव से बाहर बने शमशान में अपनी तांत्रिक विद्या से मृत सोनू को जीवित करने के लिए करीब चार घंटे तक भरसक प्रयास किया, लेकिन मृत शरीर मे कोई हरकत नही हुई। चार घंटे चली तंत्र विद्या के बाद परिजनों व ग्रामीणों ने गांव के बाहर शमशान घाट पर मृतक के शव को दफन कर दिया। मृतक अपने पीछे पत्नी नीतू व दो वर्षीय बेटी को बिलखता छोड़ गया।
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