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सूर्य शानदार है तो चांद दागदार क्यों : योगेश जैन

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जैन विद्वत संगोष्ठी में मंचासीन विद्वान। - फोटो : MAWANA
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हस्तिनापुर(मेरठ)। ऐतिहासिक प्राचीन महाभारतकालीन नगरी के तीर्थधाम चिदायतन पर शनिवार को तीसरे दिन श्री चौबीस तीर्थंकर विधान हुआ। इसमें सौ से अधिक लोगों ने भाग लिया। विद्वानों द्वारा जैन श्रावकावचार के संविधान एवं जैन श्रमणाचार के संविधान पर विशेष प्रवचन हुए। विद्वानों ने कहा कि जैन आचार अहिंसा मूल है।
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बताते चलें कि दिगंबर जैन दिव्या देशना ट्रस्ट दिल्ली, उप्र जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ के तत्वावधान एवं अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन उस्मानपुर दिल्ली तथा मेरठ द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। तीसरे दिन कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि हेमचंद जैन रहे। संचालन पं. अमन जैन शास्त्री और मंगलाचरण श्रुति जैन ने किया। सुमत प्रकाश जैन ने चार संज्ञाओं के बारे में विस्तृत विवरण किया। उन्होंने बढ़ती हुई जीवन शैली के बारे में बताया। प्रो. वीर जैन ने जैनाचार की महत्ता के बारे में कहा कि जैनाचार ब्रह्मचार मात्र नहीं है। जैन आचार अहिंसा मूलक है। जैनाचार कहता है जितनी शक्ति हो उतना काम करो। डॉ. दीपक जैन ने अष्ठमूल गुणों की महत्ता बताई। कहा कि अष्ठमूल गुणों के पालन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। पं. संयम जैन शास्त्री ने ब्रह्मचर्य के बारे में विस्तृत चर्चा की।
विदुषी दीक्षा जैन ने किया मंगलाचरण
द्वितीय सत्र में प्रो. वीर सागन व पवन जैन अलीगढ़ मौजूद रहे। मंगलाचरण विदुषी दीक्षा जैन ने किया। उप्र दिगंबर जैन शोध संस्थान लखनऊ के उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. अभय कुमार जैन व निदेशक प्रो. डॉ. राकेश कुमार जैन उपस्थित रहे। योगेश जैन ने मंच का उद्घाटन किया। पं. अमन जैन ने संचालन किया। प्रथम सत्र में सुमत प्रकाश जैन, प्रो. सागर जैन, डॉ. दीपक जैन, पं. विक्रांत पारनी, पं. संयम जैन शास्त्री, डॉ. विवेक जैन उपस्थित रहे। द्वितीय सत्र में डॉ. योगेश जैन, पं. अनिल जैन शास्त्री, डॉ. मनीष जैन, पं. शुभम जैन, देवेंद्र जैन, राकेश जैन, डॉ. संजय कुमार, विदुषी प्रज्ञा जैन रहे।
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उपाध्याय पद की आवश्यकता पर चर्चा
द्वितीय सत्र में डॉ. योगेश जैन ने सूर्य शानदार है तो चांद दागदार क्यों, इस पर विस्तार से विचार रखे। डॉ. संजय जैन ने मुनि चर्चा के संदर्भ में महाव्रतों की सतर्कता पर विचार रखे। विदुषी प्रज्ञा जैन ने साधु संघ में उपाध्याय पद की आवश्यकता के बारे में चर्चा की। इससे पूर्व सुबह जिनेंद्र अभिषेक हुआ। फिर से प्रवचन व रात्रि जिनेंद्र भक्ति हुई।
इनका रहा विशेष योगदान
अजित प्रसाद जैन, मुकेश जैन, सौरभ जैन, अनिल जैन, रोहित जैन, मोहित जैन, अजय जैन, मीडिया प्रवक्ता अरुण जैन एडवोकेट, संयम जैन, राकेश जैन, अशोक विहारिया, संजय जैन, मनीष जैन, ऋषभ जैन आदि मौजूद रहे।
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