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गन्ना-मूंगफली अंतःफसली खेती से बढ़ेगी किसानों की आय : सूर्य प्रताप शाही

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सरधना।कुशावली में चिराग कृषि फार्म में बुधवार को गन्ना-मूंगफली अंतःफसली खेती को बढ़ावा देने
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- गन्ना-मूंगफली मॉडल से बढ़ेगी किसानों की कमाई और बचेगी विदेशी मुद्रा
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- पश्चिमी यूपी में गन्ना-मूंगफली अंतःफसली खेती को बढ़ावा देने की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना (मेरठ)। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि गन्ना-मूंगफली अंतःफसली खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वह बृहस्पतिवार को गांव कुशावली स्थित कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के चिराग कृषि फार्म में गन्ना-मूंगफली अंतःफसली खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान-नीति निर्माता-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने गन्ने की फसल में मूंगफली अंतःफसलीकरण के प्रयोग का निरीक्षण और पौधरोपण कर किया। उन्होंने खेत बचाओ अभियान का संदेश भी दिया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना आधारित खेती में विविधीकरण लाने के लिए यह तकनीक उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ मूंगफली और दलहनी फसलों को शामिल करने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खाद्य तेलों के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
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कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय समेकित कृषि प्रणाली को अपनाना चाहिए। इससे आय के साथ-साथ तिलहन और दलहन उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
मुख्य वक्ता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. अमरीश कुमार नायक ने कहा कि गन्ने के साथ मूंगफली और दलहनी फसलों का समावेश किसानों की आय बढ़ाने के साथ मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगा। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों से किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 से 50 हजार रुपये और मूंगफली से 70 हजार से एक लाख रुपये तक अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने संस्थान की ओर से किए जा रहे शोध कार्यों और कृषि प्रणाली के विविधीकरण संबंधी प्रयासों की जानकारी दी। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ. एसएन सुशील ने इस तकनीक के व्यापक प्रसार की आवश्यकता बताई।
अंतरराष्ट्रीय गेहूं एवं मक्का अनुसंधान संस्थान के कंट्री हेड डॉ. महेश गठाला ने गन्ना-मूंगफली अंतःफसली खेती की सफलताओं को साझा किया। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मोदीपुरम के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस दौरान अतिथियों ने कुशावली स्थित नीर आदर्श ऑर्गेनिक फार्म का भी दौरा किया और गन्ने के साथ वैज्ञानिक पद्धति से उगाई गई मूंगफली की फसल का अवलोकन किया।
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कार्यक्रम में हरियाणा व यूपी के 15 से अधिक जिलों से आए 600 से अधिक किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों, चीनी मिल प्रबंधकों, स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ और नाबार्ड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संचालन डॉ. अमृतलाल मीणा ने किया। मुख्य परियोजना अधिकारी डॉ. रघुवीर सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. एन रवि शंकर, डॉ. आरपी मिश्र, डॉ. ललित कुमार, डॉ. टीपी स्वर्णम, विनोद सैनी, श्यामवीर सिंह, डॉ. पीयूष पूनिया, डॉ. फूलचंद जाट, डॉ. चंद्रभानु, डॉ. आशीष कुमार प्रुष्टि, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. जगन सिंह गोरा, डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. कमलेश कुमार, डॉ. प्रमोद कुमार उपस्थित रहे।
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