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बदला स्वाद: बंपर स्टॉक से उड़ी शुगर इंडस्ट्री की नींद, मिलों के पास तीन साल पुरानी चीनी का भंडार

Wed, 23 Jan 2019 12:22 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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चीनी
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देश में बढ़ते चीनी स्टॉक ने शुगर इंडस्ट्री की नींद उड़ाकर रख दी है। मांग से ज्यादा उपलब्धता और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी बहुतायत होने से चीनी की मिठास कम होने लगी है। प्रदेश में चीनी के स्टॉक की हालत ये हैं कि कई मिलों के पास तीन साल पहले तक की चीनी बची है।

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मेरठ और सहारनपुर मंडल की बात करें तो पिछले दो पेराई सत्र और चालू पेराई सत्र समेत चीनी स्टॉक 14 लाख टन से ज्यादा हो चुका है। शुगर इंडस्ट्री की हालत देखते हुए सरकार चीनी का न्यूनतम मूल्य 2900 रुपये प्रति कुंतल से बढ़ाकर 3270 रुपये करने पर विचार कर रही है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि न्यूनतम 3270 रुपये प्रति कुंतल होने पर ही बकाया गन्ना भुगतान करने में मदद मिल सकती है।

देश में बढ़ते गन्ना रकबे, उत्पादन और चीनी रिकवरी ने चीनी का स्टॉक तो सरप्लस कर दिया, लेकिन इंडस्ट्री के लिए इसका स्वाद कड़वा हो गया। पिछले पेराई सत्र में देश में बंपर गन्ना उत्पादन होने के चलते करीब 315 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। जबकि देश में चीनी की मांग करीब 245 लाख टन ही है।

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निर्यात करने के बाद भी 30 लाख टन से ज्यादा पिछला स्टॉक बचा हुआ है। इसके साथ ही चालू पेराई सत्र में भी चीनी का बंपर उत्पादन हो रहा हैं। गन्ना विभाग की मानें तो कई जगह चीनी रिकवरी पिछले साल से भी ज्यादा आ रही है। बढ़ी रिकवरी कम गन्ना निकासी की भरपाई करने में मदद कर रही है। शुगर इंडस्ट्री इस साल भी 300 लाख टन से ज्यादा चीनी उत्पादन का अनुमान लगा रही है।

सत्रवार चीनी स्टॉक के आंकड़े
मंडल    2016-17    2017-18    2018-19
मेरठ    5557    1618964    6291069
सहारनपुर    8036    3106826    4575940
नोट: चीनी स्टॉक कुंतल में है। रिकार्ड 31 दिसंबर 2019 तक है। आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।

दो साल की चीनी का भी बचा स्टॉक
मेरठ और सहारनपुर मंडल की कई शुगर मिलों के पास पिछले दो साल पहले की चीनी का भी स्टॉक है। पिछले सत्रों के साथ ही चालू पेराई सत्र समेत दोनों मंडलों के पास 31 दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार 14 लाख टन से ज्यादा चीनी स्टॉक पहुंच गया है।
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2200 करोड़ मिलों पर बकाया
पिछले साल की तरह वर्तमान पेराई सत्र का गन्ना मूल्य भुगतान नहीं हो पा रहा है। मेरठ और सहारनपुर मंडल की मिलों पर चालू पेराई सत्र का 2200 करोड़ से ज्यादा बकाया हो चुका है। सहारनपुर मंडल में 27 फीसदी और मेरठ मंडल में 28 फीसदी गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है।

क्या कहते हैं अधिकारी
चीनी के दाम कम और ज्यादा उत्पादन होने से दिक्कत तो है, लेकिन इंडस्ट्री को खरीदे गए गन्ने का तो भुगतान करना ही है। इसके लिए विभाग पूरा दबाव बना रहा है। - हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र

चीनी के बढ़ते स्टॉक से शुगर इंडस्ट्री बेहाल है। गन्ना मूल्य के सापेक्ष चीनी उत्पादन लागत में 400 रुपये प्रति कुंतल से ज्यादा का अंतर आ रहा है। चीनी का न्यूनतम मूल्य 3270 रुपये प्रति कुंतल होने से ही हालत सुधर सकती है। - डॉ. बीएस तोमर, महाप्रबंधक (गन्ना) त्रिवेणी शुगर मिल देवबंद

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