एसपी सिटी के अनुसार जांच में सामने आया है कि मनीष का छोटे मोटे मामलों को लेकर अक्सर विवाद होता आया है। जिनमें अधिकतर में मामला गांव में ही निपट गया। इसके अलावा साल 2010 में दायमपुर गांव में जमीनी विवाद को लेकर पार्षद ने एक व्यक्ति पर केस दर्ज कराया था। जिसके बाद विवाद और भी बढ़ गया था।
उसके बाद दूसरे पक्ष ने पार्षद मनीष पर जानलेवा हमले का केस दर्ज कराया था। हालांकि इंस्पेक्टर वीके आजाद का कहना है कि उस मामले में दोनों पक्षों में बाद में समझौता हो गया था और एफआर लग गई थी। पिछले दिनों हुए पार्षद के चुनाव में भी ग्रामीणों ने उसे टिकट देने का विरोध किया था। इसी वजह से अधिकतर लोग नाराज हुए थे। लेकिन एक भाजपा नेता की ओर से मनीष के लिए चुनाव प्रचार करने पर भी मनीष मुश्किल से चुनाव जीता था।
पार्षद के समर्थकों में खलबली
दरोगा व पार्षद प्रकरण में कार्रवाई न होने का भ्रम पाले पार्षद समर्थक अब बचाव के रास्ते ढूंढ रहे हैं। जिन लोगों ने हंगामा किया, पुलिस के साथ हाथापाई, धक्कामुक्की और मारपीट की, पत्थर फेंके। अब उनमें खलबली मची है।
वहीं, अब तक पुलिस ने जिन लोगों को बलवे में नामजद किया है, वे चारों नाम ऐसे हैं जिनका इस क्षेत्र से कोई खास ताल्लुक नहीं है। कभी कभार वो इधर देखने को मिलते हैं। ऐसे में मात्र उनकी नामजदगी को लेकर भी भाजपाइयों पर तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में जो भी फुटेज में हैं वह फरार हैं। अफसरों ने साफ कहा है कि आरोपी जेल जाएंगे।
होटल और जिम की जांच शुरू
सीओ दौराला पंकज सिंह का कहना है कि पार्षद मनीष चौधरी के जिम और ब्लैक पेपर होटल की जांच शुरू कर दी गई है। होटल से संबंधित कागजात अभी पुलिस को नहीं मिले है। पुलिस टीम होटल में जांच करने गई। होटल के कर्मचारी भी फरार हैं हैं। दिन भर होटल में ताला लटका रहा।
सख्त कार्रवाई होगी
आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। जो भी वीडियो फुटेज में सामने आए हैं उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
-रणविजय सिंह, एसपी सिटी
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