फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़िए, मरने से पहले क्या लिखा था मेरठ के व्यापारी ने सुसाइड नोट में

Sat, 08 Oct 2016 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
दो पेज के इस सुसाइड नोट का हर शब्द वेदना से भरा है। जिसमें कारोबारी विनीत अरोड़ा ने अपनी शिक्षा, परिवार, व्यापार और आर्थिक हालात का मार्मिक वर्णन किया है। इस दुख भरी दास्तां को बताते हुए विनीत ने अपने और परिवार के सदस्यों की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। ठहराया है तो बस खुद अपने आपको। यह कहते हुए कि सब अच्छे थे, बस मेरी किस्मत ही खराब थी।
विज्ञापन


1998 से बुरे दिनों की शुरूआत
सुसाइड नोट के पहले पेज पर विनीत ने लिखा है कि एक खुशी थी इस दुनिया में रहते हुए कि हमारा पूरा परिवार अच्छी तरह जिंदगी जीता था। हर चीज थी हम पर, एक बुरी किस्मत के अलावा। सेंट जोंस स्कूल से 12 वीं करने के बाद मैंने अपना बिजनेस सफर 1992 में शुरू किया। इस उम्मीद के साथ कि अपने पापा का बिजनेस ज्वाइन करूंगा। यह बिजनेस मेरे पापा और अंकल का था। यहीं से मेरी बुरी किस्मत शुरू हो गई। हमारा परिवार 1995 में अलग हो गया और हमें ट्रांसपोर्ट नगर की अपनी फैमिली शॉप छोड़कर मेट्रो प्लाजा जाना पड़ा। वहां रिटेल की दुकान थी, लेकिन बिक्री बहुत कम थी। इसलिए हमने होलसेल बिजनेस शुरू किया। 1998 तक सब सही था। 18 नए ब्रांड की डीलरशिप हमने ली। लेकिन बुरी किस्मत शुरू होते ही एक-एक कर सारे ब्रांड खो दिए। आखिर में एक ब्रांड बचा जो बहुत कीमती था। जिसने मुझे नहीं छोड़ा। बहुत बड़े-बडे़ नुकसान शुरू हो गए, जो लाखों में थे।

बेस्ट फ्रेंड की मां की मौत से आत्मग्लानि
उस बुरे दौर में मेरे बेस्ट फ्रें ड की मां बीमार हो गई। उन्हें अस्थमा का अटैक हुआ। मैं अपने इसी बेस्ट फ्रेंड से उधार लेता था। मुझे उम्मीद थी कि दोस्त मुझसे अपने रुपये नहीं मांगेगा। लेकिन मैंने फिर भी उधार चुकाने के लिए रुपयों की व्यवस्था करनी शुरू कर दी। इस दौरान दोस्त की मां की मौत हो गई और मैं रुपयों का प्रबंध नहीं कर पाया। इससे मुझे बहुत आत्मग्लानि हुई कि मैं आज तो वो रुपये इकट्ठा नहीं कर पाया। मैंने अपना ट्रांसपोर्ट व्यवसाय बेचने की कोशिश की। लेकिन कोई खरीददार नहीं मिला। इसलिए मुझे मजबूरन उसे मुफ्त बराबर रकम पर बेचना पड़ा। क्योंकि मुझे हर माह लाखों का नुकसान हो रहा था और यह मेरे फेल होने की पहली निशानी थी।
विज्ञापन


लोन लेने के लिए सब कुछ किया
उसी समय मेरा सारा पैसा खत्म हो गया। मैने ज्यादा से ज्यादा लोन लिया जो मेरा सबसे बड़ा नुकसान था। मैने नुकसान संभालने की खूब कोशिश की। साल दर साल लोन लेकर स्टॉक स्टेटमेंट्स बनाया। लोन लेने के लिए सब कुछ किया। सोचा था कि अपना लोन चुका दूंगा। चाहे घर या दुकान ही क्यों ना बेचनी पडे़। चीजें धीरे-धीरे सही होने लगी। मैने सोचा कि मेरा बेटा ग्रेजुएट हो जाएगा। अच्छी नौकरी में होगा तो अपने सारे लोन चुका देगा। जून 2016 तक सब सही चल रहा था, लेकिन उसके बाद प्रॉब्लम आने लगीं। मैंने फिर नुकसान चुकाने की कोशिश की, लोन लिए लेकिन मेरी किस्मत अच्छी नहीं थी। मुझे नुकसान पर नुकसान होता रहा।

सिर्फ तीन जोड़ी कपडे़ थे बेटे के पास
हमारा परिवार बेहद साधारण जिंदगी जीता था। हम कोई तंबाकू, अल्कोहल या मीट नहीं लेते थे। मेरा बेटा बहुत मिलनसार और संतोषी है। अपने लिए कभी किसी चीज की डिमांड नहीं की। वो इतना ईमानदार है कि कोई सोच भी नहीं सकता कि उसके पास सिर्फ तीन जोड़ी कपडे़ हैं। उसने अपने लिए कभी कुछ नहीं मांगा। वह पढ़ाई में भी बहुत होशियार था। प्री नर्सरी से 11 वीं तक वह हमेशा फर्स्ट, सेकेंड ही आया। रेयर ही थर्ड आया। लेकिन इसके नीचे कभी नहीं। मेरा बेटा सच में बेस्ट डिसर्व करता था। लेकिन मैं उसके लिए नुकसान की वजह से कुछ नहीं ला पाया। जबकि उससे कम होशियार बच्चों के पास उससे ज्यादा चीजें थीं। वह हमेशा मुझसे कहता रहा कि पापा मुझे कुछ नहीं चाहिए। मेरे पास सब कुछ है। मुझे आपका और बस आपका प्यार चाहिए। मैं उससे बहुत माफी मांगता हूं।

हमारी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं
दूसरे पेज में लिखा है कि मेरी सारी उम्मीदें खत्म हो गई हैं। मेरे पास जीने का कोई और मौका नहीं है। (इस पत्र में मेरी सारी जानकारी, बैलेंस शीट और सारी इच्छाएं भी हैं) मैंने सब कुछ अपने मां बाप और इकलौते बेटे को साफ-साफ बता दिया। सबने मुझसे पूछा कि मैं क्या चाहता हूं। उन्होंने कहा कि अगर हमने अब शुरू किया तो बुरे से और गंदा और भयानक हो जाएगा। हम उस समय की तरफ जा रहे हैं जहां हमारे पास पैसा भी नहीं होगा।
हमारे खाने की चीजों को खरीदने के लिए और रहने के लिए और मैं ऐसी परिस्थिति में नहीं रहना चाहता, जहां मुझे भुखमरी की परिस्थिति देखनी पडे़, क्योंकि कुछ दिनों बाद में अपने पुराने घाटे की वजह से अपना बिजनेस खो दूंगा। इस वजह से मैं हम सब की जिंदगी खत्म कर देना चाहता हूूं। सबने यह बात मान ली। हम पांच परिवार के विनीत, पत्नी पूजा, बेटा अभिषेक, पिता मोहन, मां कृष्णा अरोड़ा अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी खत्म करते हैं। हमारी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं है। हम यह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि पैसे के बिना हमारी जिंदगी खत्म हो रही है और हमारे पास कोई चारा नहंी है। क्योंकि मैं अपने परिवार को बदनामी और गरीबी से बचाना चाहता हूूं।

सब अच्छे थे, बस मेरी किस्मत ही खराब थी
मेरा सारा स्टाफ ईमानदार और अच्छा था। सब मेरे लिए बहुत मेहनत करते थे। लेकिन मेरी किस्मत की खराब थी। मैं ये भी लिखना चाहूंगा कि मेरे कांटेक्ट में जो भी था, उसने मेरा बहुत सहयोग किया। जैसे कि ग्राहक, मेरा स्टाफ, बैंक , सरकारी कर्मचारी। सबसे बड़ी समस्या मेरी किस्मत ही थी। 1998 से मेरी कमाई सारे खर्चे नहीं उठा पा रही थी। महीन दर महीने मुझे नुकसान हो रहा था। इसलिए मैं ये बताना चाहता हूं कि हम खुद अपनी इच्छा से मर रहे हैं। हमारी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं है। इसलिए किसी को इसकी सजा ना मिले।

हाईफाई इंगलिश बोलता था विनीत
कारोबारी परिवार के परिचितों ने बताया कि विनीत अरोड़ा बचपन से ही इंगलिश मीडियम स्कूल में पढ़ा था। हाईफाई इंगलिश बोलता और लिखता था। उनके कारोबार के कर्मचारियों ने बताया कि विनीत भाईसाहब लेटर आदि भी इंगलिश में ही लिखते थे। बड़ी पार्टियों में भी इंगलिश में ही बात करते थे। हर कोई व्यापारी परिवार के इस कदम से दुखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें