जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि इस रोग से कोई भी प्रभावित हो सकता है। किसी व्यक्ति में यह संक्रमण बहुत हल्का हो सकता है, जहां संक्रमण के कोई संकेत या लक्षण नहीं दिखते, लेकिन फिर भी वह व्यक्ति इस वायरस का वाहक बन सकता है।
उस व्यक्ति से यह दूसरे व्यक्ति में पहुंच सकता है, इसलिए हर किसी को सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखनी चाहिए और हाथ साफ रखने के नियमों का सख्ती से पालन करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि लगातार बड़ी संख्या में मरीज मिल रहे हैं, लेकिन अभी भी वक्त है संभल सकते हैं।
आंकड़ों पर नजर
उम्र मौत
20-29 05
30-39 24
40-49 34
50-59 34
60-69 31
70 से अधिक 27
45 साल से अधिक- 155 में से 109 लोग हैं।
(14 से 28 अप्रैल तक हुई मृत्यु)
फेफड़ों की नसों में ब्लड क्लॉटिंग हो रही
सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि कोरोना वायरस की वजह से फेफड़ों की नसों में ब्लड क्लॉटिंग हो रही है। इसकी वजह से ऑक्सीजन के रास्ते बंद हो जाते हैं और मरीजों की मौत हो जाती है। दूसरी बीमारियों की तुलना में कोरोना वायरस ज्यादा ब्लड क्लॉटिंग बना रहा है। कोरोना वायरस की वजह से क्लॉटिंग क्यों बन रही है, अभी इस पर रिसर्च जारी है।