दरअसल, विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन फेफड़े में संक्रमण को ज्यादा गंभीर नहीं होने देती। ये हमें संक्रमण से बचा रही है और कोरोना वायरस से लड़ने में हमारी मदद कर रही है। इसकी मदद से मरीज गंभीर रूप से बीमार नहीं हो पाते हैं। यह बचाव के लिए है।
खतरनाक स्थिति में पहुंचने से बचा रही वैक्सीन
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रवीण गौतम ने बताया कि शरीर में एंटीबॉडीज होंगे तो जान बच जाएगी। वायरस यदि नाक और मुंह से शरीर में जाता है तो उसे वैक्सीन नहीं रोक सकती, उसके लिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत होती है। फिर भी इंफेक्शन हो जाता है तो वैक्सीन खतरनाक स्थिति में पहुंचने से बचा सकती है। अभी तक की स्टडी में तो यही बात सामने आई है।
खतरा कम रही वैक्सीन
सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तलियान ने बताया कि वैक्सीन से जिंदगी बचाने में सफलता मिल रही है। ये इंफेक्शन होने के बाद का खतरा कम करती है। वैक्सीन की दो डोज लेने से कोरोना वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है और खतरे की आशंका कम होती है। वैक्सीन फेफड़े को सुरक्षा देती है, जिससे संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है।
कोरोना टीकाकरण की स्थिति
अब तक टीकाकरण- 307167 (बूस्टर डोज सहित)
हेल्थ केयर वर्कर-15614
फ्रंटलाइन वर्कर-11371
आमजन में
60 साल से अधिक- 106325
45 साल से अधिक- 114025
बूस्टर डोज- 59832 (यानी दोनों डोज)