सहारनपुर। देवबंद के विश्व विख्यात दारुल उलूम और महानगर के प्रमुख मदरसा मजाहिर उलूम कदीम और मजाहिर उलूम जदीद सहित जिले में 754 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें देश भर के छात्र दीनी तालीम ले रहे हैं। ये छात्र किन-किन प्रदेशों और शहरों के रहने वाले हैं, न जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास इनका डाटा है और न ही संख्या। इससे विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर होती है।
दरअसल, जिले में सदर तहसील क्षेत्र के महानगर के गंगोह रोड, पुरानी, मंडी समिति रोड, खानआलपुरा, खाताखेड़ी, अंबाला रोड, चिलकाना, गागलहेड़ी, जनता रोड, पुवांरका, माहेश्वरी, रसूलपुर में छोटे-बड़े मदरसे हैं। इसी तरह बेहट तहसील क्षेत्र में मुजफ्फराबाद, बादशाही बाग, बेहट, मिर्जापुर, कलसिया, नकुड़ तहसील क्षेत्र के गंगोह, खानपुर गुर्जर, कुंडाकला, बुढ़नपुर, सरसावा, पिलखनी, नकुड़, लखनौती, टिडौली, सांगाठेड़ा, बसी, अंबेहटा, अंबेहटा चांद, तहसील देवबंद, लबकरी, गोपाली, राजूपुर, गोपाली, थीतकी, सांपला, मानकी, बास्तम, झबीरण, इमलिया में छोटे-बड़े सभी तरह के मदरसे हैं।
- बड़ी संख्या में कई प्रदेशों के छात्र
मदरसा प्रबंधन सूत्र बताते हैं कि दारुल उलूम व मजाहिर उलूम कदीम और मजाहिर उलूम जदीद सहित अन्य मदरसों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिमी बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर, झारखंड, सिक्किम, त्रिपुरा, ओडिशा, पंजाब, छत्तीसगढ़, मिजोरम, तेलंगाना, महाराष्ट्र, दिल्ली, मेरठ और कर्नाटक सहित अन्य प्रांतों से छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
तहसीलमदरसों की संख्या
सदर290
बेहट165
नकुड़-152
देवबंद-119
रामपुर मनिहारान28
- वर्जन:
जिले में 754 मदरसे संचालित हो रहे हैं। मदरसों में देश भर से छात्र दीनी तालीम हासिल करने आते हैं, लेकिन छात्र किन-किन प्रदेशों और शहरों के रहने वाले हैं, इसका डाटा विभाग के पास नहीं है। मदरसा प्रबंधन के पास ही इनका डाटा होता है।- भरत लाल गोंड, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी