सहारनपुर में डी-फार्मा के छात्र ने खुदकुशी कर ली। सुसाइड से पहले छात्र ने व्हाट्सएप स्टेटस लगाया था। छात्र माता-पिता के बीच चल रहे विवाद से आहत था। इसी अवसाद में उसने मौत को गले लगा लिया।
सहारनपुर जिले के छुटमलपुर कस्बे की नई बस्ती में डी-फार्मा के छात्र वंश (20) ने अपने मफलर से फंदा बना पंखे से लटक कर जान दे दी। मरने से पहले छात्र ने हालात बता रहे हैं मौत जवानी में ही होगी का व्हाट्सएप स्टेटस लगाया था। वंश अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। बताया जाता है कि माता-पिता के बीच चल रहे अलगाव से वह आहत था। इसी अवसाद में उसने मौत को गले लगा लिया।
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फतेहपुर थाना इलाके के गांव कमालपुर में मां रीता रानी आशा वर्कर है। पेंटर का काम करने वाले पति जितेंद्र से अनबन होने के चलते वह पिछले 8-10 वर्षों से छुटमलपुर में अलग-अलग जगहों पर कमरा लेकर रह रही थी। वर्तमान में वह नई बस्ती में किराए पर कमरा लेकर रह रही थी।
शनिवार सुबह रीता की बड़ी बेटी वंशिका फाइनेंस कंपनी में अपनी जॉब पर गई थी। छोटी बेटी अनु ट्यूशन गई थी। रीता घर का काम कर रही थी। सुबह करीब आठ बजे वंश ने मोबाइल के व्हाट्सएप स्टेटस को अपडेट करते हुए लगता है मौत जवानी में होगी लगाया था।
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इसके बाद साढ़े आठ बजे वह अपने कमरे में पंखे से फंदे पर लटका मिला। रीता किसी काम से कमरे में गई। उसने बेटे को फंदे पर लटके देखकर शोर मचाया। शोर सुनकर पहुंचे पड़ोसी वंश को लेकर अस्पताल गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
वंश मां के साथ गृहस्थी का बोझ उठाने के लिए रात के वक्त किसी प्राइवेट कंपनी में काम भी करता था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का है। अभी कोई तहरीर नहीं आई है। यदि तहरीर आती है तो रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
बेटे की मौत पर भी खत्म नहीं हुआ मां-बाप के बीच का मन मुटाव
जिस बेटे ने मां बाप की अनबन में अपनी जान दे दी। उसकी मौत के बाद भी रीता और जितेंद्र के बीच का मनमुटाव लोगों के बीच तमाशा बना रहा। मौत की सूचना पर पहुंचे जितेंद्र और उसके परिवार के लोग जहां रीता पर बेटे की आत्महत्या के आरोप लगा रहे थे, वहीं रीता और उसके मायके वाले जितेंद्र को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे।
पुलिस को ही दोनों पक्षों के बीच हस्तक्षेप करना पड़ा। इतना ही नहीं पोस्टमार्टम के बाद जब शव छुटमलपुर पहुंचा तो रीता अपने भाइयों के साथ उसे छुटमलपुर के श्मशान घाट में ले गई। वहां उसका अंतिम संस्कार किया गया, जबकि जितेंद्र और उसके परिजन बेटे का संस्कार अपने पैतृक गांव कमालपुर में करना चाहते थे।
इसके लेकर भी दोनों पक्षों में काफी जद्दोजहद हुई। पड़ोसियों ने बताया कि जितेंद्र कभी कभार बच्चों से मिलने आ जाता था। चार दिन पहले भी जितेंद्र छुटमलपुर बच्चों के पास आया था। उस वक्त उसकी अपनी पत्नी से काफी कहासुनी हुई थी। तभी से वंश अवसाद में चल रहा था।
वह सुबह उठकर नहाया और कपड़े पहने। इसके बाद वह छोटी बहन को ट्यूशन में भी छोड़ कर आया था। वहां से आने के बाद उसने आत्मघाती कदम उठाया। उसके दोस्तों का कहना था कि स्टेटस देख कर जब तक वह उसके घर पहुंचते वह दुनिया छोड़ चुका था।