संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान महोत्सव के 14वें दिन 110 परिवारों की ओर से श्रद्धा एवं भक्ति के साथ विधान का आयोजन किया गया। शुभारंभ जिनेंद्र भगवान के मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक से हुआ।
शांतिधारा का सौभाग्य रमा-रमेश चंद्र जैन, पंकज जैन, देवांशु जैन एवं ईशु जैन सपरिवार को प्राप्त हुआ। मुनि भाव भूषण महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है और सफलता उसकी शोभा है। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उसे सीख और प्रेरणा के रूप में स्वीकार करना चाहिए। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति हजार बार असफल हो जाए तो भी उसे एक बार फिर प्रयास करना चाहिए। निरंतर परिश्रम और प्रभु कृपा से सफलता अवश्य मिलती है।
विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। पंडित आशीष जैन और दिलीप जैन शास्त्री ने विधिविधान के अनुसार मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं।
संध्याकाल में संगीतमय महाआरती में पंच परमेष्ठी भगवान, भगवान शांतिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी की आरती उतारी गई। श्रद्धालुओं ने 120 अर्घ्य समर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भजन संध्या में भक्तों ने जिनेंद्र भगवान के समक्ष चंवर ढुलाकर भक्ति नृत्य किया। भजन गायकों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित क्षेत्र के अनेक पदाधिकारियों और समाजसेवियों का विशेष सहयोग रहा।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद- फोटो : credit