अधिनियम को लेकर यह हैं मांगे
- नए व्हीकल अधिनियम में स्कूल बस में महिला अटेंडेंट का होना जरूरी है। स्कूल संचालकों का कहना है अगर महिला अटेंडेंट बस में रखी जाती है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।
- अधिनियम के अनुसार स्कूल बस में हर सीट पर सीट बेल्ट होनी चाहिए। बस स्टाफ के लिए यूनिफॉर्म में होना और अग्नि सुरक्षा यंत्र होना जरूरी है। बस में कैमरे भी होने चाहिए। अगर कोई भी स्कूल संचालक इन सभी सुविधाओं को बस में देता है तो बस का किराया बढ़ेगा।
- सरकार अभी स्कूल बसों पर 28 से 45 फीसदी तक जीएसटी लगाती है। अगर सरकार इस तरह स्कूल संचालकों का उत्पीड़न करेगी तो उनको जीएसटी में छूट मिलनी चाहिए।
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- स्कूल से जुड़े सभी वाहनों में होने वाली दुर्घटना की जिम्मेदारी सीधे-सीधे स्कूल प्रबंधन व संचालक की होगी। जोकि पूर्णतया गलत है।
- स्कूल बसों के संचालन की वर्तमान व्यवस्था के तहत आरटीओ स्कूल बसों की निगरानी करते हैं। लेकिन अधिनियम में परिवर्तन होने के बाद जिला स्तर पर दो समितियों का गठन किया जाएगा। पहली जिला ट्रांसपोर्ट कमेटी और दूसरी स्कूल ट्रांसपोर्ट कमेटी। इस प्रकार तीन स्तरीय जांच व्यवस्था होने व निगरानी कमेटी द्वारा जांच करने के कारण भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
स्कूल के गेट पर लगाएं शिक्षकों की टीम : डीआईओएस
मेरठ स्कूल फेडरेशन ने 28 व 29 अगस्त को स्कूल बसें न चलाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में डीआईओएस गिरजेश चौधरी ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। डीआईओएस ने कहा है कि ऐसी स्थिति में अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय छोड़ने और लेने अपने वाहन से आएंगे। इससे स्कूल के बाहर जाम लगने की आशंका है। लिहाजा बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय के अध्यापकों की टीम विद्यालय के गेट पर लगाएं।
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