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ऑयल नहीं , गर्म पानी से रायफल साफ करती है पुलिस

Sat, 23 Jan 2016 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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पश्चिम उत्तर प्रदेश में आतंकी साया मंडरा रहा है। देश की सुरक्षा एजेंसियों की आतंकी गतिविधियों पर पैनी नजर है। गृह मंत्रालय ने वेस्ट यूपी के तमाम जिलों के एसएसपी और डीएम को हाई अलर्ट जारी करने का निर्देश दिया हुआ है। लेकिन मेरठ पुलिस महकमे में इसका मजाक उड़ाया जा रहा है। आतंकियों के आधुनिक हथियारों से मुकाबले के लिए यूपी पुलिस के पास सन 1957 के जंग लगे हथियार हैं। लेकिन इससे ज्यादा शर्मनाक और चिंताजनक बात ये है कि जंग लगे हथियारों की सफाई थानों में पानी से की जा रही है। अगर कोई आतंकी घटना हो जाए, तो खाकी कैसे निपटेगी, इसका अंदाजा आम जनता भी लगा सकती है।
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गर्म पानी में डुबोते हैं
थानों में पानी गर्म करके राइफल, ग्लॉक पिस्टल समेत अन्य हथियारों को साफ किया जा रहा है। यह सफाई कोई एक्सपर्ट या हेड मोहर्रिर नहीं, बल्कि सिपाही और होमगार्ड करते हैं। सिपाही और होमगार्ड की हथियार साफ करते हुए तस्वीरें अमर उजाला ने कैमरे में कैद की हैं।

आर्म्स मोहर्रिर की है जिम्मेदारी
नियमानुसार पुलिस लाइन में तैनात आर्म्स मोहर्रिर को प्रत्येक सप्ताह थानों में जाकर हथियारों की साफ सफाई करनी चाहिए। जिस हथियार में गड़बड़ी है, उसे पुलिस लाइन लाकर दूसरा हथियार देने की जिम्मेदारी उसी की है। खराब हथियार पुलिस को कानपुर या सीतापुर भेजना चाहिए, जहां उसकी मरम्मत होती है। लेकिन पिछले पांच साल से एक भी हथियार ठीक होने नहीं भेजा गया।
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मौके पर नहीं चलती गोली?
थानों में रखे हथियार सालों से नहीं चले। आपातकालीन स्थिति में ये हथियार धोखा दे सकते हैं। लिसाड़ीगेट में तैनात पुलिसकर्मी एकांत यादव की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, लेकिन दूसरे सिपाही से राइफल से गोली नहीं चली। हालांकि दूसरे सिपाही ने राइफल की बट से बदमाशों को पीट-पीटकर मार डाला था। इसके अलावा भी कई बार हथियारों से धोखे मिले हैं।

हेड मोहर्रिर की देखरेख में हथियार
थानों में हेड मोहर्रिर की देखरेख में हथियारों की निगरानी होती है। नियम है कि आर्म्स मोहर्रिर थाने जाए और हेड मोहर्रिर से प्रत्येक हथियार के बारे में जानकारी ले, लेकिन ऐसा केवल कागजों में होता है। सवाल उठता है कि जब हेड मोहर्रिर को हथियारों की जिम्मेदारी दी जाती है, तो वह सिपाही या होमगार्ड से उनकी सफाई कैसे करा सकते हैं। वहीं पुलिस अधिकारी थाने में निरीक्षण करने जाते हैं तो हथियारों को चलाने या फिर रिहर्सल में हमेशा पुलिस फेल हुई है।
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