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यूपी: कुख्यात धर्मेंद्र किरठल से पूछताछ जारी, एसटीएफ ने उसकी निशानदेही पर बरामद किया तमंचा

Thu, 10 Jun 2021 12:34 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

पुलिस ने कुख्यात धर्मेंद्र किरठल से पूछताछ की है। किरठल से पूछताछ में अभी कई बड़े राज खुल सकते हैं। एसटीएफ ने उसकी निशानदेही पर तमंचा भी बरामद किया है।
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कुख्यात धर्मेंद्र किरठल का फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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देहरादून से गिरफ्तार किए गए इनामी धर्मेंद्र किरठल और उसके साथी सुभाष उर्फ छोटू को लेकर एसटीएफ रमाला थाने पहुंची। धर्मेंद्र किरठल की निशानदेही पर एसटीएफ ने रमाला के जंगल से तमंचा बरामद किया। यह तमंचा 12 दिसंबर को किरठल गांव के जंगल में इरशाद की हत्या में इस्तेमाल किया गया था। आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराकर पूछताछ के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।

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एटीएफ के रिकॉर्ड के मुताबिक, धर्मेंद्र किरठल के खिलाफ 53 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें यूपी के बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर के अलावा हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान में भी मुकदमे हैं। इनमें करीब 10 मुकदमे हत्या के हैं। वह बीए पास है और उम्र 50 साल है। अक्टूबर 2020 में गैंगस्टर एक्ट के तहत पुलिस-प्रशासन ने उसकी 60 लाख की संपत्ति भी कुर्क की थी।

जेल में सुरंग बनाने व डिप्टी जेलर हत्याकांड में भी था शामिल
एसटीएफ के एएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि धर्मेंद्र किरठल 2006 में जनक यादव उर्फ अजय जडेजा व उसके साथी राहुल त्रिवेदी के साथ धौलपुर राजस्थान में गिरफ्तार हुआ था। 2007 में जब वह मेरठ जेल में था तो कैदियों ने भागने के लिए करीब 40 फीट लंबी सुरंग खोद दी थी। इसमें धर्मेंद्र किरठल का भी नाम आया था। इसके अलावा सख्ती बरतने पर उसने अजय जडेजा और ज्ञानेंद्र ढाका के साथ मिलकर डिप्टी जेलर नरेंद्र द्विवेदी की हत्या कर दी थी। जेल में रहते हुए उसने 2009 में किरठल गांव निवासी साहब सिंह और गवाह मदन नाहर सिंह की पुरानी रंजिश के चलते हत्या कराई थी। 2011 में जेल से जमानत पर बाहर आने पर ग्राम प्रधान कृष्णपाल से रंजिश हो गई थी। इस पर साथियों के साथ मिलकर जानलेवा हमला करा दिया था। कृष्णपाल बाल-बाल बच गया था। 2013 में धर्मेंद्र किरठल ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। 2014 में जेल से बाहर आ गया था।
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इसके बाद 12 दिसंबर 2020 को कृष्णपाल के घर रहने वाले इरशाद पुत्र फखरूद्दीन की हत्या गोली मारकर हत्या कर दी थी। तभी से वह फरार था और आईजी ने उस पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। सुभाष उर्फ छोटू निवासी सिसौली, थाना भौराकलां, मुजफ्फरनगर की किरठल में रिश्तेदारी है। वह 25 साल से धर्मेंद्र किरठल के साथ ही रहता है।

नीटू कैल ने किया था स्वचालित हथियारों से घर पर हमला
धर्मेंद्र किरठल 2002 में ग्राम प्रधान था। तब गांव के ही सुरेंद्र और नरेंद्र से उसकी रंजिश हो गई थी। सुरेंद्र की शादी तब के कुख्यात रहे नीटू निवासी कैल, शामली की बहन से हुई थी। नीटू कैल ने अपने साथियों के साथ मिलकर 2004 में स्वचालित हथियारों से धर्मेंद्र किरठल के घर पर हमला कर दिया था। इसमें धर्मेंद्र के पिता, चाचा, भाई और भाभी मारे गए थे, जबकि बहन गंभीर घायल हो गई थी। धर्मेंद्र किरठल ने पत्नी के साथ पड़ोसी के घर में कूदकर अपनी जान बचाई थी। 2004 में ही धर्मेंद्र ने रोहतक (हरियाणा) में नरेंद्र और उसके एक साथी की हत्या कर दी थी। इसी वर्ष गांव के ही ब्रह्म सिंह की हत्या कर दी थी। 2005 में सुरेंद्र की हत्या शामली में की गई थी। घर पर किए गए हमले में शामिल अनिल भारसी निवासी कांधला और बबलू निवासी केजारेडी, शामली की गाजियाबाद कोर्ट से पेशी से लौटते समय मुरादनगर में हत्या कर दी थी। नीटू कैल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

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