मुजफ्फरनगर डिग्री कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
एमबीबीएस के दोनों छात्रों ने पूछताछ में बताया कि अंबाला निवासी संदीप की बेटी मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज की छात्रा है। संदीप उन्हें कहता था कि अच्छे नंबर दिलवाएगा। संदीप ने ही उनकी कांपियों में खेल कराकर फंसाया है। संदीप ने अपनी बेटी की कॉपी क्यों नहीं बदलवायी। हालांकि इस छात्रा को एसटीएफ ने फिलहाल छोड़ दिया है, लेकिन जांच सूची में इसका नाम दर्ज किया है।
आयुष के पिता हैं वरिष्ठ डॉक्टर
एसटीएफ के एसपी ने बताया कि आयुष के पिता डॉ. सुनील कुमार हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। कुछ दिन पहले वे गुड़गांव के एक अस्पताल में डॉक्टर थे। पूछताछ में आयुष और सुनील कुमार ने बताया कि सीसीएसयू का का छात्रनेता कविराज चार साल से उनका मित्र था। उन्होंने कॉपी बदलवाने के लिए कभी नहीं कहा था। लेकिन कविराज उनके घर तक भी जुड़ा हुआ था। छात्रनेता कविराज का दोनों छात्रों के परिजनों के यहां भी आना-जाना था। 15 मार्च को ही कविराज ने कहा था कि वह खाली कॉपी दें, नंबर अच्छे आ जाएंगे। कविराज के झांसे में छात्र फंस गए।
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