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नागरिकों के बारे में मूलभूत जानकारी रखना राज्यों का दायित्व

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नागरिकों के बारे में मूलभूत जानकारी रखना राज्यों का दायित्व
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में विशेष व्याख्यान भारतीय संविधान एवं नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिकता विषय पर आयोजित किया गया। राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि देश के नागरिक अच्छे होंगे तो वह संविधान को संभाल लेंगे। उन्होंने प्राचीन समय से ही राज्य का यह दायित्व है कि वह अपने नागरिकों के बारे में मूलभूत जानकारी रखें, जिससे राज्य का विकास निरंतर होता रहे। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पश्चिमी देशों या अन्य देश सभी ने नागरिकता देने के प्रावधान बना रखे हैं। विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर राजवीर शर्मा नेशनल फेलो भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान शिमला एवं पूर्व प्रोफेसर इग्नू ने कहा कि सीएए के बारे में यह शंका है कि यह मुस्लिमों के खिलाफ है, जबकि ऐसा नहीं है।
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उन्होंने बताया कि इस कानून के पहले भी भारत में सन 1971 में बांग्लादेश से आए हुए शरणार्थियों को नागरिकता दी गई थी। यह कानून तीन देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देगा, क्योंकि वहां पर उनका उत्पीड़न हो रहा है। कानून यह नहीं कहता कि मुस्लिमों को नागरिकता नहीं मिलेगी, उनको मिलेगी लेकिन सहमति के आधार पर जैसे अदनान सामी को दी गई है, लेकिन धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर नहीं। डॉ. राजेंद्र कुमार पांडेय ने अतिथियों और अन्य विभागों से आए शिक्षक और छात्र-छात्राओं का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में डॉ. भूपेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. देवेंद्र उज्ज्वल, डॉ. सुषमा रामपाल, डॉ. अशोक पवार, नितिन त्यागी, रवि पोसवाल, संतोष कुमार आदि शामिल रहे।
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