हालांकि, स्टांप घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने के लिए पत्राचार हो चुका है। पुलिस की विवेचना में मुख्य आरोपी विशाल वर्मा के साथ रजिस्ट्री और कोषागार के चार अधिकारियों की भूमिका मिली है। जिनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
बताया जा रहा है कि उक्त चारों अफसरों को आरोपी विशाल वर्मा पैसा देने के साथ-साथ मौजू मस्ती कराता था। इसके सुबूत भी पुलिस ने जुटा लिए है। उक्त चारों अफसरों में से दो अधिकारियों को तबादला दूसरे जनपद में हो चुका है, जिनको पुलिस और विभाग के उच्च अधिकारियों ने नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा है।
एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी का कहना कि इस प्रकरण की जांच पुलिस क्राइम ब्रांच में चल रही है। अब तीन साल की जगह पांच साल के स्टांप की जांच विभागीय अफसर कर रहे हैं।