घोसीपुर मामले में एसएसपी से शिकायत करते पहुंचे पुलिसकर्मियों से अधिवक्ताओं की होती धक्कामुक्की।
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एसएसपी ऑफिस पर शनिवार दोपहर अधिवक्ता और पुलिस में हाथापाई हो गई। अधिवक्ता घोसीपुर में खूनी संघर्ष के मामले में एकतरफा कार्रवाई करने की शिकायत लेकर आए थे। वहीं अधिवक्ता के जबरन ऑफिस में घुसने पर एसएसपी ने पुलिसकर्मियों को जमकर फटकार लगाई।
अधिवक्ता सरताज गाजी और उसमान गाजी पक्ष में शुक्रवार को खरखौदा क्षेत्र के घोसीपुर में पथराव और फायरिंग हुई थी। इसमें सरताज गाजी का चचेरा भाई गुलफाम और एक युवती नेहा उर्फ तनु घायल हो गए थे। एकतरफा कार्रवाई करने की शिकायत लेकर शनिवार दोपहर दो बजे अधिवक्ता सरताज गाजी अपने साथी वकीलों के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंचे। एसएसपी फाइलों पर हस्ताक्षर
कर रहे थे, इसलिए उन्होंने अधिवक्ताओं को ऑफिस से बाहर बैठने को कहा।
आधे घंटे इंतजार करने के बाद अधिवक्ताओं ने हंगामा करना शुरू किया। जिस पर अधिवक्ताओं और ऑफिस पर तैनात पुलिसकर्मियों की हाथापाई हो गई। बाद में एसएसपी ने शिकायत करने आए पांच अधिवक्ताओं को अंदर बुलाया और उनकी शिकायत सुनी। एसएसपी ने मामले की जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। उधर, अधिवक्ताओं का कहना था कि एक फाइल पर हस्ताक्षर करने के लिए एसएसपी ने जानबूझकर उनको आधा घंटे बाहर बैठाया। एसएसपी के कहने पर पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की है।
तो वर्दी उतार दो...
एसएसपी से मिलने के लिए अधिवक्ता जबरन ऑफिस में घुसे तो गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों को एसएसपी ने बुला लिया। एसएसपी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वर्दी उतार दो। कायरता से नौकरी करने वाले पुलिसकर्मियों की विभाग में जरूरत नहीं है।
गेट पर ड्यूटी लगा रखी है तो बगैर परमीशन के अंदर अधिवक्ता कैसे आ गए। एसएसपी ने स्टेनो और पीआरओ से तत्काल तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर पुलिस लाइन में उनकी वर्दी जमा करने की बात कही। इस पर पुलिसकर्मियों ने दोबारा ऐसा न होने की बात कहकर एसएसपी से माफी मांगी। बाद में एसएसपी ने पुलिसकर्मियों से लिखित में जवाब देने की बात कही।
सुबह 10 से 12 बजे तक फरियादियों की शिकायत सुनने का समय होता है। अधिवक्ता दोपहर दो बजे शुक्रवार को हुए खूनी संघर्ष के मामले को लेकर आए थे। फाइलों का काम करने के बाद मैंने उनको बुलाया और उनकी शिकायत सुनी। पुलिस पर अभद्रता करने का आरोप गलत है। - डीसी दूबे, एसएसपी