बस्ता प्रबंधन के लिए कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय
जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी के मुताबिक, चुनाव में प्रचार के बाद मतदान के दिन बूथ स्तर पर प्रबंधन कमजोर पड़ने की स्थिति से बचने के लिए अभी से तैयारी की जा रही है। बस्तों पर ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की योजना है, जिन्हें अपने क्षेत्र के मतदाताओं की जानकारी हो और जो मतदाताओं तक पर्चियां पहुंचाने का प्रबंधन कर सकें।
मतदान से ईवीएम सील होने तक एजेंटों की भूमिका अहम
महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी ने बताया कि मतदान केंद्रों पर एजेंटों की भूमिका को लेकर दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। पार्टी चाहती है कि एजेंट मतदान शुरू होने से लेकर ईवीएम सील होने और फॉर्म 17-सी प्राप्त करने तक अपनी जिम्मेदारी निभाएं। फॉर्म 17-सी में मतदान केंद्र पर डाले गए मतों का आधिकारिक लेखा-जोखा दर्ज होता है।
पश्चिमी यूपी में संगठन मजबूत करने की रणनीति
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय राठी के मुताबिक, मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखता है। पार्टी पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के साथ किसान वर्ग की गोलबंदी को चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। इसी क्रम में स्थानीय विधायकों, पूर्व प्रत्याशियों और सेक्टर प्रभारियों को दैनिक रिपोर्टिंग व्यवस्था से जोड़ने की बात कही गई है।
पार्टी के अनुसार, पिछले विधानसभा चुनाव में मेरठ जिले की सात सीटों में से सपा ने चार सीटें जीती थीं, जबकि गठबंधन के तहत एक सीट राष्ट्रीय लोकदल के खाते में गई थी। मिशन 2027 के लिए पार्टी अब बूथ स्तर की तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।