सपा-रालोद मिलकर लड़ेंगे, भाजपा की मुश्किलें बढ़ना तय
मेरठ। विधानसभा चुनाव में गठबंधन के लिए तैयार सपा-रालोद पंचायत चुनाव भी मिलकर लड़ने जा रहे हैं। पंचायत चुनाव दोनों दलों के लिए विधानसभा चुनाव का ट्रायल होगा। दोनों दलों की इस चाल में भाजपा उलझ गई है। अब पंचायत चुनाव में उसके सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे अन्य दलों की नजर भी इस गठबंधन के नतीजों पर रहेगी।
विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा जहां संगठन स्तर पर तैयारी में जुटा है, तो विपक्षी दल कांग्रेस, सपा और रालोद किसान आंदोलन के सहारे ंकिसान पंचायतें कर विधानसभा चुनाव को अभी से साधने में जुट गए हैं। इस बीच त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी सभी दल अपनी-अपनी ताकत आजमाने की बात कह चुके हैं। भाजपा जहां पंचायत चुनाव को भी अपने मुख्य चुनाव की तरह लेकर तैयारी में जुटी है, तो सपा, कांग्रेस, बसपा और रालोद भी सक्रिय हैं। सपा और रालोद विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का एलान पहले से ही करते रहे हैं लेकिन पंचायत चुनाव अलग-अलग लड़ने की बात कही जा रही थी। अब दोनों दलों ने पंचायत चुनाव भी गठबंधन कर लड़ने का निर्णय लिया है।
किसान आंदोलन के चलते देहात में जाट बहुल गांवों में माहौल भाजपा के पक्ष में नहीं है। वहीं मुस्लिम और दलित पहले ही भाजपा से कटे हुए हैं। इसके अलावा किसान संगठनों से जुड़े अन्य बिरादरी के लोग भी भाजपा से कटे हैं। ऐेसे में सपा और रालोद के लिए संयुक्त रुप से चुनाव लड़ना भाजपा के लिए मुसीबत बन गया है। जनपद में जिला पंचायत के 33 वार्ड में से करीब 15 वार्ड ऐसे हैं जहां जाट और मुस्लिम मिलकर पासा पलट सकते हैं। सपा-रालोद इसी गणित के बूते पंचायत चुनाव में भाजपा को झटका देने का मंसूबा बना रहे हैं।
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वार्ड आरक्षण से गडबड़ाई भाजपा की रणनीति
जिला पंचायत के वार्ड आरक्षण ने पहले ही भाजपा की रणनीति गड़बड़ा दी है। भाजपा के तमाम दावेदार आरक्षण के चलते मायूस होकर या तो घर बैठ चुके हैं या फिर दूसरे वार्ड में संभावनाएं तलाश रहे हैं। ऐसे में भाजपा में बगावत हो सकती है।
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अभी कोई निर्देश नहीं मिला
पंचायत चुनाव में गठबंधन सिर्फ अटकलें हैं। विधानसभा चुनाव में ही हमारा गठबंधन है। फिलहाल, हम पंचायत चुनाव अकेले दम पर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
- चौधरी यशवीर सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष, रालोद
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2547 करोड़ रुपये गन्ना बकाया भी बनेगा चुनावी मुद्दा
मेरठ। पिछले तीन पेराई सत्र से गन्ना मूल्य नहीं बढ़ने और बढ़ रहा बकाया भाजपा के लिए पंचायत चुनाव में मुश्किलें बढ़ा सकता है। किसान आंदोलन के चलते जहां भाजपा नेताओं को गांवों में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। तीन साल से गन्ना रेट नहीं बढ़ने और समय से गन्ना मूल्य बकाया भुगतान नहीं होने से किसान बेहद नाराज हैं।
उधर, चालू पेराई सत्र में मंडल की मिलों पर करीब 2300 करोड़ बकाया हो चुका है, जबकि पिछले साल का भी करीब 247 करोड़ रुपया बकाया है। मोदीनगर, सिंभावली और मलकपुर मिल ने तो अभी तक भुगतान ही नहीं किया है। किनौनी, ब्रजनाथपुर, रमाला मिल ने 2 से 9 फीसदी बकाये का भुगतान किया है। दौराला, साबितगढ़ और अगौता मिल ने ही संतोषजनक भुगतान किया है।
पिछले पेराई सत्र के 247 करोड़ रुपये बकाए में सबसे ज्यादा मोदीनगर, मलकपुर और सिंभावली मिल पर है। मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र का कहना है कि गन्ना मूल्य बकाए के भुगतान के लिए शुगर मिलों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। बिक्री होने वाली चीनी का 85 फीसदी भुगतान किसानों के खातों में भिजवाया जा रहा है।