रैली में चंद्रशेखर के पोस्टर लेकर पहुंचे समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
गठबंधन की साझा रैली में भीड़ के बीच कुछ युवाओं ने भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर आजाद का फोटो वाला पोस्टर लिया हुआ था। उनके साथ युवाओं की भीड़ भी थी, जो मंच के सामने पहुंचने के बाद जोरदार नारेबाजी कर रही थी। रैली के दौरान इन युवाओं ने चंद्रशेखर को अपना नेता साबित करने का प्रयास किया।
रविवार दोपहर देवबंद में गठबंधन की साझा रैली हुई। रैली में सहारनपुर के अलावा मुजफ्फरनगर, कैराना और बिजनौर के लोग भी पहुंचे थे। करीब साढ़े 12 बजे कुछ युवकों की भीड़ हाथों में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद के फोटो वाले पोस्टर थे। वह पोस्टर को हाथों में ऊपर उठाकर भीम आर्मी जिंदाबाद का नारा बुलंद करते रहे। काफी देर तक नारेबाजी होती रही। इसके बाद जब नेताओं ने मंच से भाषण किया, तब भी इन युवकों के हाथ में चंद्रशेखर के पोस्टर ही रहे। इन युवकों में से गांव सूबरी निवासी अनुज कुमार ने कहा कि चंद्रशेखर हमारा हीरो है, लेकिन चुनाव में हम बसपा के साथ ही हैं। तल्हेड़ी निवासी देवेंद्र का कहना था कि सामाजिक नेता हैं चंद्रशेखर, लेकिन वोट बहनजी के लिए है।
बसपा नेताओं की बढ़ गई थी टेंशन
जब भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर आजाद के पोस्टर लेकर युवा भीड़ के बीच पहुंचे, तब तक बसपा सुप्रीमो मायावती नहीं पहुंची थीं। भीड़ के बीच से चंद्रशेखर के पोस्टर ऊपर ही दिखाई दे रहे थे, जिसके चलते बसपा नेताओं की टेंशन बढ़ गई। क्योंकि बसपा की तरफ से भीम आर्मी का समर्थन नहीं किया जाता है, बल्कि भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर द्वारा वाराणसी से चुनाव लड़ने का एलान करने के बाद बसपा सुप्रीमो ने तीखा प्रहार किया था और इस कदम को भाजपा से मिलकर बसपा के खिलाफ साजिश करना बताया था। यही वजह थी कि मंच से बसपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी शमसुद्दीन राईन और बसपा के पूर्व विधायक जगपाल सिंह ने भी माइक से कई बार कहा कि भीड़ के बीच झंडे, बैनर और पोस्टर नीचे कर लीजिए।
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