डिफेंस कॉलोनी में रह रही विश्व में दूसरी व भारत की सबसे लंबी महिला श्वेतलाना का बेटा करन सिंह भी मदर्स डे पर उन्हें सरप्राइज गिफ्ट देगा। करन ने बताया कि मम्मी अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी होने की वजह से ज्यादातर विदेश में रहती हैं। जून में 10 वर्ष के हो रहे करन सिंह मोदीपुरम स्थित यानकी एंड डोडल्स स्कूल में कक्षा सातवीं के छात्र हैं। स्वेतलाना की लंबाई 7 फुट 4 इंच हैं, जबकि नौ वर्षीय करन सिंह की लंबाई 7 फुट 1 इंच है। करन की अब तक की ज्यादातर परवरिश उनके पिता संजय सिंह व दादा-दादी ने की है। जब भी मम्मी की याद आती है तो वे वीडियो कॉल के जरिए बात कर लेते हैं। फिलहाल पैर में चोट की वजह से स्वेतलाना सिंह एक साल से आराम कर रही हैं। करन से जब मदर्स डे पर मम्मी के लिए सरप्राइज गिफ्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह तो रविवार को ही बताएंगे।
कलर्स पर आएंगे नजर
पिता संजय सिंह ने बताया कि करन के लिए बॉलीवुड से ऑफर आते रहते हैं, लेकिन करन डॉक्टर बनना चाहते हैं। फिलहाल वह कलर्स पर एक प्रोग्राम में अभिनय करते नजर आएंगे। करन को बास्केटबॉल, क्रिकेट खेलना पसंद है।
आदित्य के लिए मां ही है पूरी दुनिया
कंकरखेड़ा। नॉर्मल बच्चों की ही देखभाल करना हम सबके लिए कितना मुश्किल होता है, लेकिन यदि कोई बच्चा स्वलीनता बीमारी से ग्रस्त हो। जिसमें बच्चा अपनी ही दुनिया में खोया रहता है। ऐसे बच्चों की देखभाल सिर्फ एक मां ही कर सकती है।
मंगल पांडे नगर की रहने वाली कुमकुम बाला पत्नी सुनील गुप्ता ने बताया कि वह कैंट स्थित केवी पंजाब लाइन स्कूल में टीचर है। उनके पति प्राइवेट जॉब करते हैं। उनके एक ही बेटा आदित्य है। आदित्य 15 साल का है। कुमकुम बाला ने बताया कि वह (ऑटिज्म बीमारी) स्वलीनता से ग्रस्त है। 15 साल का हो गया है। शारीरिक रूप से फिट है, लेकिन मानसिक रूप से नहीं। अभी मानों जैसे कि वह पांच साल को हो। कुमकुम बाला बताती हैं कि वह जो भी कार्य करता है सिर्फ अपनी मर्जी से ही करता है। यदि स्कूल जाना है तो जाना है और नहीं जाना है तो फिर नहीं जाना। आदित्य मां से इतना प्यार करता है कि उनके बिना एक दिन भी नहीं रह पाता। नॉर्मल बच्चों की तरह उसकी दिनचर्या और खाना पीना बिल्कुल अलग रहता है। बस यही डर रहता है कि मैं नहीं रही तो मेरे बेटे का क्या होगा।
मम्मी की मेहनत ने हमें बनाया टॉपर
मदर्स डे पर विशेष
बोर्ड टॉपर्स मम्मी को देते हैं सफलता का श्रेय
आज सरप्राइज गिफ्ट देकर मम्मी को देंगे शुभकामनाएं
धूप को साया, जमी को, आसमां करती है मां
हाथ रखकर मेरे सर पर, सायेबां करती है मां
मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद
उसके क़दमों पर निसार,
हां की गुंजाइश न हो तो, फिर भी हां करती है मां
मेरठ। मशहूर शायर नवाज देवबंदी की ये पंक्तियां मां के उस रूप को साक्षात परिलिक्षित करती हैं, जो हर मुश्किल में बच्चे का हाथ थामे हैं। संसार की तमाम दुश्वारियाें को दरकिनार रख मां बच्चे की सफलता की दुआ मांगती है। हर कदम पर मां अपने बच्चे की शक्ति बनकर खड़ी होती है। जीवन की इन्हीं चुनौतियों का सामना कर, मम्मियों ने बच्चों को बोर्ड परीक्षा में सफल बनाया है। सीबीएसई, आईसीएसई या यूपी बोर्ड 2019 की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत अंक लाने वाले टॉपर सफलता का श्रेय मां को देते हैं। वो कहते हैं कि ये बोर्ड परीक्षाएं हमारी नहीं, बल्कि मम्मी की बोर्ड परीक्षा थी। अपनी पढ़ाई से ज्यादा मम्मी के सहयोग और योगदान से हम टॉपर बने। आज मदर्स डे पर हमें मौका मिला है कि अपनी मम्मी के लिए कुछ करें। मदर्स डे पर बोर्ड परीक्षा के टॉपर ने अपनी उन भावनाआें को साझा किया जिसे वो अपनी मां से क ह नहीं पाए।
मेरी हर गलती को मम्मी ने सुधारा
सोफिया गर्ल्स स्कूल से दसवीं की टॉपर खुशी अरोरा सफलता का श्रेय मम्मी डॉ. कोमल अरोरा को देती हैं। खुशी कहती हैं मैं पढ़ने के दौरान अक्सर गलती कर देती थी। अपनी गलती पर बैठकर रोती तो मम्मी मुझे समझाती कि आगे से ऐसी कोई गलती नहीं करना। मेरे खाने-पीने का ख्याल रखने से लेकर पढ़ाई में जब भी कोई परेशानी आई तो मम्मी ने उस परेशानी को हल कराया। गणित में मेरी बहुत मदद करती थीं। मम्मी चिकित्सक हैं मुझे पूरा टाइम देती हैं।
मम्मी के बनाए टाइम टेबल को किया फॉलो
सोफिया गर्ल्स स्कूल में 12वीं की जिला टॉपर अक्षिति मनोहर कहती हैं मेरी परीक्षा के लिए मम्मी ने इतना अच्छा टाइम टेबल बनाया, मैं शायद ऐसा नहीं कर पाती। मोती प्रयाग कॉलोनी निवासी अक्षिति की मम्मी सुनीता मित्तल गृहणी हैं। बकौल अक्षिति मेरी पढ़ाई की पूरी शेड्यूलिंग मम्मी ही करती। केवल टाइम टेबल बनाकर छोड़ा नहीं उसे फॉलो कराया। मुझे ट्रैक करती थी कि मैं तनाव में तो नहीं हूं। सही पढ़ रही हूं या नहीं। मेरे पल-पल की जानकारी वो खुद रखतीं। जब मेरा मूड खराब होता तो मुझे प्रेरित करतीं और जब मूड सही होता तो सच्चाई से रूबरू करातीं।
जब भी टूटा मां ने ही संभाला
दीवान पब्लिक स्कूल से दसवीं की परीक्षा में टॉपर बने शुभ अग्रवाल कहते हैं बोर्ड परीक्षा के दौरान मैं कई बार हताश हुआ, टूट जाता। लेकिन मम्मी ने मुझे कभी थकने नहीं दिया। शुभ की मम्मी निधि अग्रवाल गृहणी हैं, परिवार प्रभात नगर में रहता है। बकौल शुभ हमारी जिंदगी में मेरी परीक्षा से कुछ दिन पहले काफी मुश्किलें आईं। परेशानी के उस दौर में मुझे लगा कि मैं तो अच्छे से पढ़ाई ही नहीं कर पाऊंगा। लेकिन मम्मी ने मुझे हर मुश्किल में हौसला बंधाया। वो समझाती डू द बेस्ट, लीव द प्रॉब्लम, जो भी अच्छा कर लोगे वो तुम्हारे लिए है। वाकई अगर मम्मी मुझे इतना नहीं संभालती तो मैं कभी सफल नहीं होता।
मेरे लिए खुद का कॅरियर भूल गईं मम्मी
दीवान पब्लिक स्कूल से पढ़ाई कर सीबीएसई दसवीं की परीक्षा में ऑल इंडिया में टॉपर बने वत्सल वार्ष्णेय कहते हैं, मम्मी ने मेरे लिए अपने कॅरियर से बहुत कांप्रोमाइज़ किया। वत्सल की मम्मी डॉ. तरंग गोयल मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं। परिवार सोमदत्त विहार में रहता है। बकौल वत्सल मम्मी हमेशा मेरे खाने का ख्याल रखती। खुद जॉब पर जाती, लेकिन मेरी हर चीज को तैयार करके रखती। मैं टेंशन में न आऊं, मेरे पसंद का खाना बनाना, टाइम देने की पूरी कोशिश करती थीं। शाम 5 बजे घर आकर, मेरे सोने और खाने का पूरा ध्यान रखतीं। डिसीजन लेने में पूरा साथ देतीं। पूरे एक साल उन्होंने अपने एकेडमिक करियर और क ांफ्रेंस पर ध्यान नहीं दिया। इसकी वजह से उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ा।
मम्मी लेती थीं टेस्ट, इसलिए बनी बेस्ट
केएल इंटरनेशनल स्कूल से बारहवीं की परीक्षा देकर जिला टॉपर बनी अनन्या कहती है मेरी पढ़ाई में मम्मी सोनिया गोयल का सबसे बड़ा रोल है। बोर्ड परीक्षा की पूरी तैयारी में मम्मी मेरा टेस्ट लेती थीं। सदर निवासी अनन्या के अनुसार मम्मी ने मुझ पर कभी प्रेशर नहीं डाला, काम नहीं कराया। म्यूजिक, फाइन आर्ट में मेरी काफी मदद की थी। पूरे साल ही हमारे घर में मेहमानों का आना एकदम कम कर दिया, बल्कि मम्मी-पापा भी कहीं नहीं गए। इतना ही नहीं हर विषय का मम्मी दो से तीन बार टेस्ट लेती और मेरा टाइम मैनेजमेंट चेक करतीं। यही वजह थी कि मैं सभी पेपर बहुत अच्छे से हल कर पाई। आज मदर्स डे पर हम मूवी जाएंगे और मम्मी को गिफ्ट भी दूंगी।
आज मम्मी की पसंद का नाश्ता बनाऊंगी
एमपीजीएस में बारहवीं की टॉपर बनीं वंशिका भगत मदर्स डे पर मम्मी सीमा गौतम भगत के लिए उनकी पसंद का नाश्ता बनाकर उन्हें सरप्राइज देंगी। बकौल वंशिका पहले मम्मी को चाय बनाकर पिलाऊंगी ताकि वो खुश हो जाएं फिर नाश्ता खिलाऊंगी। वंशिका क ी मम्मी सीमा भगत प्राथमिक विद्यालय नगली किठौर में प्रिंसिपल हैं। वंशिका कहती हैं मेरी मम्मी खुद कामकाजी महिला हैं, लोग तो बच्चों की बोर्ड परीक्षा के लिए छुट्टी ले लेते हैं, लेकिन मम्मी ने मेरी बोर्ड में कोई छुट्टी नहीं ली। मेरे पेपर थे तो उन्हें पहले से ज्यादा काम बढ़ गया, मेरा खाना, दूध, यूनिफार्म सब मैनेज क रने के लिए वो अतिरिक्त समय देतीं। कभी मुझसे कोई काम नहीं कराया। पूरा टाइम दिया।
मदरहुड पर लिखा उपन्यास
वंशिका मम्मी से इतनी प्रभावित हैं कि उन्होंने 11वीं कक्षा में ही अपनी मम्मी के लिए एक उपन्यास मदर एट 19 मदरहुड लव लिखा। इसमें मां के जीवन की चुनौतियां, संतान के लिए उसके समझौतों को जाहिर किया। 2019 जनवरी में यह उपन्यास प्रकाशित हुआ।अमेजॉन, फ्लिपकार्ट सभी पर उपलब्ध है, इंडियन लिटरेचर टॉप 20 रेटिंग में है।
इंग्लिश में मम्मी ने किए डाउट क्लीयर
सेंट मेरीज एकेडमी से आईसीएसई बोर्ड परीक्षा में 12वीं में जिला टॉपर बने आर्यमन के इंग्लिश के डाउट मम्मी क्लीयर करती थी। गंगानगर निवासी आर्यमन आनंद की मम्मी मेनका आनंद गृहणी और पिता अंबर आनंद स्पोर्ट्स उद्यमी हैं। बकौल आर्यमन मम्मी ने केवल मेरा ख्याल ही नहीं रखा बल्कि पढ़ाई में पूरी मदद करती रहीं। मुझे पढ़ते समय खाने का वक्त ही याद नहीं रहता था। मुझे शाम को 6 बजे दूध देना, हेल्दी डाइट देना, लेट नाइट स्टडी में भी कुछ खाने-पीने का देना सब मम्मी करतीं। इंग्लिश में जहां भी प्रॉब्लम आती तो मम्मी ही उसे हल करतीं, इसलिए मैं सफल हो सका।
मां ने हमेशा प्रेरित किया
एमपीजीएस स्कूल से सीबीएसई बारहवीं की परीक्षा में टॉपर बनीं दिव्या अग्रवाल कहती हैं मेरी परीक्षा में मम्मी मुझसे ज्यादा कांफिडेंट रहती थी। दिव्या की मम्मी अर्चना अग्रवाल कामकाजी महिला हैं। परिवार जागृति विहार में रहता है। बकौल दिव्या मेरा लंच-डिनर पढ़ाई के कारण छूटता ही था, लेकिन मम्मी उसकी कमी कैसे पूरी करनी है यह ध्यान रखती। मैं तो हॉपलेस होकर चिल्लाने लगती, रोने लगती तो वो मुझे प्रेरित करती। वो मुझ पर इतना भरोसा करती हैं कि उन्होंने मुझे परीक्षा में भी किसी काम के लिए नहीं रोका। घूमने-फिरने की पूरी आजादी दी। शायद यही वजह थी कि मैं तनाव रहित होकर पढ़ पाई। यही चीज मेरे लिए इंस्पायरिंग फैक्टर बनी। उन्हें मेरी क्षमताएं पता हैं मैं बिल्कुल भी कांफिडेंस नहीं रहती, उन्हें भरोसा था लेकिन मुझे नहीं था। मम्मी के लिए सरप्राइज प्लान किया है, शॉपिंग भी की है।
मेरी सफलता में मम्मी की अहम भूमिका
सेंट मेरीज एकेडमी से पढ़ाई कर आईसीएसई दसवीं में एनसीआर के टॉपर बने वैदिक अग्रवाल मदर्स डे को लेकर खासे उत्साहित हैं। बकौल वैदिक परीक्षा में मेरी सफलता के पीछे मम्मी डॉ. सारिका का बड़ा रोल रहा। पूरे पेपर में मम्मी रोजाना का टाइम टेबल बनाने में मदद करती रहीं। मेरे लिए नई-नई किताबें लाकर देतीं, ताकि मैं और अच्छा पढ़ सकूं। बायोलॉजी और हिंदी में उन्होंने काफी मदद की। आई लव माय मॉम।
मां के साथ से मिला हौसला
सिटी वोकेशनल पब्लिक स्कूल में दसवीं की परीक्षा में सफल हुए मनराज कहते हैं अगर मम्मी का साथ न मिलता तो मैं कभी पास नहीं होता। मनराज की मम्मी मनमीत चड्ढा इसी स्कूल में कार्यरत हैं। बकौल मनमीत 2011 में हमें मनराज की कमी के बारे में पता चला, कि इसके मसल्स वीक हो रहे हैं। तभी मुझे लगा कि ये समय हारने का नहीं, बल्कि बच्चे के साथ खड़े होने का है। बकौल मनराज मेरी परीक्षा में मम्मी ने कभी अहसास नहीं होने दिया कि मैं अकेला हूं। मुझे पेपर में लेकर जाना, बैठाना, छोड़ना, वापस लाना सब मम्मी करती। मेरा हर ख्याल रखा। मैं तो कई बार टूट जाता कि मम्मी मुझसे पढ़ाई नहीं होगी, लेकिन वो हमेशा मुझे संभालती रही। इसलिए मैं इतने अच्छे अंक लाया।
मेरी पढ़ाई के लिए छोड़ा अपना काम
सोफिया गर्ल्स स्कूल में कॉमर्स की टॉपर श्रीवस्ता ने आज मदर्स डे पर मम्मी की पसंद की चीजें खरीदी हैं। जिसे वो मम्मी प्रियंका सेठ को देगी। श्रीवस्ता की मम्मी प्रियंका जीडी गोयंका स्कूल पल्लवपुरम में शिक्षिका हैं। श्रीवस्ता कहती हैं मैं सचमुच मम्मी को हैड्सऑफ करती हूं कि वो इतना सब कैसे मेनेज करती हैं। मेरी परीक्षा में उन्होंने चार से पांच महीने की छुट्टी ली। ताकि वो मेरा पूरा ख्याल रख सकें। मेरी हर छोटी सी चीज का पूरा ख्याल रखा। मुझे कभी घर पर अकेला नहीं छोड़ा। स्कूल, ट्यूशन में कभी लेट नहीं होने दिया, सारा दिन घर पर ही रहती थी मुझे देखने के लिए की तबियत ठीक है या नहीं। उनकी मेहनत है जो मैं सफल हुई।
तेजी से बदल रहा है समाज : नवाज देवबंदी
‘मां की कदर है सबसे बड़ी सफलता
उसकी एड़ी पर्वत चोटी लगती है
मां के पांव से जन्नत छोटी लगती है’
अजीम शायर नवाज़ देवबंदी ने अपनी कलम से मां की मोहब्बत, ममता का अद्भुत शब्दांकन किया है। अपनी पंक्तियों में मां के हर रूप का आदर करते हैं। नवाज़ देवबंदी कहते हैं कि आज का आधुनिक युग बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें भारतीयता, हमारी संस्कृति दम तोड़ रही हैं। उसमें एक परंपरा मां के प्रति है वो भी बदल रही है। मां के साथ जैसा सुलूक होना चाहिए, वो आज की पीढ़ी नहीं कर रही। उसी का नतीजा है कि लोग डॉक्टर, इंजीनियर तो बन रहे हैं। लेकिन मां के प्रति कर्तव्य भूल रहे हैं। जबकि मां की सेवा हमें इंसान बनाती है। अगर आज की नस्लें मानव बनना चाहती हैं तो अपनी मां की सेवा के लिए नतमस्तक रहें। ऐसा करेंगे तो बड़ी से बड़ी मंज़िलें पैरों में आकर गिर जाएंगी। हमारे पास जो भी है ये इज्ज़त, शोहरत, दौलत, शब्दों की चमक, वो मां से मोहब्बत करने का नतीजा है। दुनिया के मां बाप अपनी औलाद से कुछ भी नहीं चाहते, केवल आज्ञाकारिता चाहते हैं। लेकिन संतान अपने मां बाप से सब कुछ चाहती है। दौलत, बैंक बैलेंस, पैसा चाहती है। मां बड़ी कीमती चीज़ है जिसे कुदरत ने दिया है, जिनके पास है वो उनकी सेवा करें, जिनकी चली गई वो दूसरी की माताओं की कद्र करें।
.....पर माँ तू आज भी माहिर है मुझे समझने में
याद आती है मुझे माँ की वो लोरियां
भिगो देती है मुझको वो यादों की बोरियां
साया माँ का मेरे साथ कुछ इस तरह रहता है
जैसे हर वक्त मुझसे कुछ ये कहता है
कहती थी कि दुनिया बहुत सिखाती है
वो गम की बारिश में बहुत भिगोती है
इंसान नही वे जो इस मतलब में सदा रहते है
दूसरो को दुखी कर खुद मस्त वे बने रहते है
जीवन निकल जाएगा मेरा खुद को ढूंढने में
पर माँ तू आज भी माहिर है मुझे समझने में
कितना अच्छा था बचपन तेरे आंचल की छांव में
सरल हो जाता था जीवन तेरे भावों की नाव में
ये पंक्तियाँ वे तीन बहनें अपनी माँ को समर्पित करती हैं, जिनके संघर्ष ने तीनों बहनों को सफलता का मुकाम प्रदान किया। शास्त्री नगर निवासी सविता देवी ने अपनी तीनों बेटियों को समाज की परवाह न करते हुए उच्च शिक्षा प्राप्त कराई। आज इनकी दो बेटियां बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापिकाएं व तीसरी बेटी यूपी पुलिस में टेक्निकल पद पर कार्यरत हैं। तीनों बहनों के सरकारी विभाग में होने पर सविता जी गौरवान्वित महसूस तो करती हैं। साथ ही उस समय को याद करती हैं जब बेटा न होने का ताना उन्हें अक्सर सहना पड़ता था। बेटियों की शिक्षा के लिए भी अक्सर उन्हें सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कभी भी किसी भी प्रकार की विकट परिस्थितियों में अपना और अपनी बेटियों का आत्मविश्वास टूटने नही दिया। उन्हें सदैव साहसी एवं सशक्त बनाया।