बिजनौर। जल जीवन मिशन (हर घर नल) के तहत जिले के सभी गांव में घर घर पाइप लाइन से पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। एक ओर जहां अभी भी कई गांव ऐसे हैं, जहां आज तक टंकी का निर्माण ही पूरा नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे भी गांव हैं, जहां कुछ दिन पानी आने के बाद ही टंकी सूखी पड़ी हुई हैं।
करीब 1800 करोड़ रुपये की लागत से जिले के 2252 गांवों में पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछाई जानी थी। शुरूआत में सड़क तोड़कर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन आज तक वहां सड़क की मरम्मत ही नहीं हुई। आज की तारीख में विभाग 1508 गांवों में पाइपलाइन बिछाने का दावा कर रहा है।
वहीं 209 से ज्यादा जगहों पर परियोजना को पंचायत को हैंडओवर करने का काम किया जा चुका है। धरातल पर देखें तो ऐसे कई जगह नजर आ रही हैं, जहां पर पानी भी सप्लाई ही नहीं हो रही है।
केस एक...अफजलगढ़ क्षेत्र के गांव मानियावाला में पांच साल पूर्व पानी की टंकी का निर्माण हुआ था। शुरू में एक साल पानी आया लेकिन इसके बाद पानी की आपूर्ति नहीं हुई। भीषण गर्मी के चलते गांव में पेयजल का संकट बना हुआ है।
केस दो...कादराबाद की हिदायतपुर ग्राम पंचायत के गांव पत्थर वाला में दो वर्ष पूर्व पानी की पाइप बिछाने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पंहुचा है। इस क्षेत्र में सरकारी हैंडपंप तक नहीं है। शुद्ध पेयजल के लिए परेशान हैं।
केस तीन... पैजनिया में करीब तीन करोड़ की लागत से नए ओवर हेड टैंक का निर्माण एवं नई पाइप लाइन बिछाना प्रस्तावित था। करीब दो वर्ष पूर्व काम शुरू हुआ लेकिन न तो पाइप लाइन ही बिछ पाई और न ही ओवर हेड टैंक का निर्माण ही शुरू हो पाया। ग्राम प्रधान नंद किशोर फौजी ने बताया की नई पाइप लाइन बिछाने के कारण पुरानी पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई है।
केस चार...गजरौला शिव में जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत गांव में बनाई जा रही पानी की टंकी का निर्माण तीन वर्ष से चल रहा है। ग्रामीणों को अभी इस योजना से पेयजल मयस्सर नहीं हुआ। गांव की सड़कें टूटी पड़ी हैं। गजरौला अचपल, मुकीमपुर धर्मसी में बनी टंकी भी अधूरी पड़ी है।
केस पांच... करीब एक करोड़ की लागत से गांव चकशहजानी में पिछले चार साल से टंकी का निर्माण चल रहा है। अभी तक काम पूरा नहीं हुआ है। विरामपुर में भी ऐसी ही हालत है। उधर, बीडीओ रोहिताश सिंह का कहना है कि इस संबंध में जल निगम के अधिकारियों को बार बार अवगत कराया जा रहा है।
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करीब 94 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लगातार काम की निगरानी की जा रही है और उसे पोर्टल पर अपलोड भी किया जा रहा है। - राकेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, जल निगम