ट्यूबवेल ऑपरेटर परीक्षा का पेपर आउट कराया
सीओ ने बताया कि विजय तोमर ने स्वीकार किया कि तीन अगस्त को हुई ट्यूबवेल ऑपरेटर परीक्षा में उसने पेपर आउट कराया गया था। इस परीक्षा में अभ्यर्थियों से पांच-पांच लाख रुपये लिए गए थे। उसने अपने साथी शिक्षक सचिन निवासी गंगानगर को एक दिन पहले ही परतापुर बाईपास पर ट्यूबवेल ऑपरेटर का पेपर दे दिया था। पेपर के बदले में सचिन ने उसे दस लाख रुपये भी दे दिए थे, लेकिन बाद में एसटीएफ ने सचिन समेत अन्य युवकों को गिरफ्तार कर लिया था। अंत में यह परीक्षा निरस्त हो गई थी।
सिविल कोर्ट की परीक्षा में भी सेंधमारी की कोशिश
विजय ने यह भी बताया कि 20 जनवरी को सिविल कोर्ट स्टाफ की परीक्षा के लिए भी सेंधमारी की कोशिश की गई, लेकिन पेपर नहीं मिला। इस परीक्षा के 20 अभ्यर्थियों से सात से दस लाख रुपये में सौदा हुआ था। पेपर आउट नहीं हुआ तो अभ्यर्थियों को आंसर शीट भेज दी थी, जिससे परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों से पैसा लिया जा सके। लेकिन ब्रह्मपुरी क्षेत्र के एस्ट्रॉन कॉलेज में नकल करते हुए मुजफ्फरनगर के विभोर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जिससे एसटीएफ को पूरा फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया।
कहां से आती है आंसर शीट, विक्रम खोलेगा राज
एसटीएफ सीओ बृजेश सिंह का कहना है कि कस्टम अधीक्षक विजय तोमर उर्फ नीटू ने बताया कि उसके पास पेपर और आंसर शीट सोनीपत के मॉडल टाउन निवासी विक्रम भेजता था। विक्रम से विजय की दस साल से दोस्ती है।
एसटीएफ विक्रम की तलाश में लगी है, लेकिन वह घर से फरार है। पूछताछ में विजय ने यह भी बताया कि एक ही पेपर के कई-कई सेट होते थे। जो पेपर विक्रम देता था, वह उसी पेपर की उत्तर कुंजी तैयार कराते थे, लेकिन परीक्षा में किस अभ्यर्थी के पास कौन से सेट की कॉपी जाएगी, यह नहीं पता चलता था।
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