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UP: पीवीवीएनएल की ऐतिहासिक पहल, सोलर बिजली बनेगी कमाई का जरिया, उपभोक्ता बाजार में बेच सकेंगे ऊर्जा

Fri, 06 Feb 2026 03:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में पीवीवीएनएल ने इंडिया एनर्जी स्टैक के तहत देश का पहला इंटर-स्टेट पी2पी सोलर ऊर्जा ट्रेडिंग पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया, जिससे उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेच सकेंगे।

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बिजली का एक सब-स्टेशन। संवाद
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विस्तार
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डिजिटल ऊर्जा क्षेत्र में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) ने एक नई और दूरगामी पहल की है। इंडिया एनर्जी स्टैक (आईईएस) फ्रेमवर्क के तहत शुरू किए गए इंटर-स्टेट पीयर-टू-पीयर (पी2पी) सोलर ऊर्जा ट्रेडिंग पायलट प्रोजेक्ट में पीवीवीएनएल सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह पहल देश में उपभोक्ता केंद्रित, पारदर्शी और आधुनिक ऊर्जा बाजार के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 

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पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने बताया कि इस ऐतिहासिक पायलट परियोजना के अंतर्गत पीवीवीएनएल, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) और राजधानी पावर लिमिटेड के साथ मिलकर देश का पहला इंटर-स्टेट पी2पी ऊर्जा ट्रेडिंग मॉडल संचालित कर रहा है। इस मॉडल के तहत पीवीवीएनएल क्षेत्र के वे उपभोक्ता, जिनके परिसरों में सोलर पैनल और स्मार्ट मीटर लगे हैं, अपनी अतिरिक्त सौर ऊर्जा को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे बाजार में बेच सकेंगे। 

उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं को न केवल अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा, बल्कि ऊर्जा की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी सरल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनेगी। इससे उपभोक्ता पहली बार केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि सक्रिय ऊर्जा उत्पादक और बाजार सहभागी के रूप में सामने आएंगे। गौरतलब है कि इंडिया एनर्जी स्टैक, भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय की एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है। इसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और उपभोक्ताओं के बीच एक सुरक्षित, भरोसेमंद और इंटरऑपरेबल डिजिटल ढांचा विकसित करना है। इस पायलट परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे उपभोक्ता अपनी ऊर्जा खपत, सौर उत्पादन और संभावित लेन-देन से जुड़े निर्णय अधिक सटीकता से ले सकेंगे।
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प्रबंध निदेशक ने बताया कि स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से ग्रिड संचालन की दक्षता बढ़ेगी, नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। यह परियोजना भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा आधारित, डिजिटल और उपभोक्ता केंद्रित बिजली बाजार के निर्माण की मजबूत नींव रखेगी।

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