अमर उजाला ने मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद के खेतों की सेहत की जानकारी हासिल की। कृषि वैज्ञानिक और मृदा परीक्षण विभाग के सहायक निदेशक अरुण कुमार से मिट्टी की जांच की मिली रिपोर्ट चौंकाने वाली सामने आयी है। मिट्टी के मुख्य पोषक तत्वों में जहां नाइट्रोजन की कमी है वहीं ऑर्गेनिक कार्बन की हालत भी बेहद खराब है। कहीं पर पोटाश का स्तर कम है तो कहीं पर शूक्ष्म तत्वों की स्थिति भी चिंताजनक है।
मिट्टी की सेहत खराब होने के ये हैं कारण
-किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराने में लापरवाही बरत रहे हैं।
-अधिक पैदावार लेने के लिए किसान संतुलित रासायनिक खादों का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
-किसानों ने खेतों में गोबर और हरी खाद का काम उपयोग करना शुरू कर दिया है।
एक नजर में जिलेवार मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति
जिला मेरठ
नाइट्रोजन बहुत कम
फास्फेट मीडियम
पोटाश अधिक
आर्गेनिक कार्बन बहुत कम
जिला बागपत
नाइट्रोजन बहुत कम
फास्फेट बहुत कम
पोटाश मीडियम
आर्गेनिक कार्बन बहुत कम
जिला गाजियाबाद
नाइट्रोजन बहुत कम
फास्फेट मीडियम
पोटाश अधिक
आर्गेनिक कार्बन बहुत कम
किसी भी फसल की अच्छी पैदावार लेने के लिए किसान को सबसे पहले मिटटी की जांच करानी चाहिए। मिटटी की सेहत रिपोर्ट कार्ड के आधार पर खाद का उपयोग होना चाहिए। पूरे मंडल की मिटटी में मुख्य और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी सामने आ रही है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार ने इस वर्ष भी कृषि विभाग को खेतों से मिटटी के 90 हजार नमूने लेकर जांच करने का टारगेट दिया हुआ है। 12 पैरामीटर पर मिटटी की जांच की जा रही है। काफी जागरूक किसान हैं जिन्होंने मिटटी की जांच कराकर फसलों का उत्पादन बढ़ाया है। - अरुण कुमार, सहायक निदेशक मृदा परीक्षण एवं कल्चर मेरठ।