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योगी सरकार से डरे सपाई, बंद कमरे में किया प्रदर्शन, फिर घर चले गए

Tue, 27 Jun 2017 09:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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सपाईयों का बंद कमरे में प्रदर्शन
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विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश में मजबूत विपक्ष की भूमिका का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी मेरठ में दो फाड़ हो गयी है। मंगलवार को योगी सरकार के 100 दिन के रिपोर्ट कार्ड का विरोध एक खेमे ने पार्टी कार्यालय के बंद कमरे में प्रदर्शन कर किया। तख्तियां लहराईं, नारेबाजी की और भाषण सुनकर सपाई घरों को लौट गए। जबकि पार्टी के स्थानीय दिग्गजों ने इस बैठक या प्रदर्शन से किनारा किया। उन्होंने केवल विज्ञप्ति जारी कर सरकार का विरोध जताया।
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खेमों में बंटी सपा  
सपा में वर्तमान में एक खेमे में सपा के विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री, जिला व महानगर अध्यक्ष हैं। वहीं दूसरा खेमा छात्र सभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान का है। पार्टी सूत्रों के अनुसार पार्टी कार्यालय में कोई बैठक करने की अनुमति जिलाध्यक्ष से लेनी होती है। लेकिन मंगलवार को एक खेमे द्वारा की गई बैठक में खुद जिलाध्यक्ष या अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ही नहीं पहुंचे। 
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राज्यपाल को सौंपेंगे रिपोर्ट

सपाईयों का प्रदर्शन
पार्टी कार्यालय में अतुल प्रधान ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते कहा कि योगी सरकार के 100 दिनों में अपराधों की झड़ी लगी है। महिला कल्याणकारी योजनाएं जैसे समाजवादी पेंशन तक बंद कर दी गयी। कर्ज माफी के नाम पर किसानों को ठगा गया। यूपी में जातिगत संघर्षों को बढ़ावा दिया गया। योगी राज के 100 दिनों में अपराधों की पूरी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी जाएगी। इस दौरान लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष अमित सिवाच, छात्र सभा के जिलाध्यक्ष राजदीप विकल, सम्राट, गुड्डू चौधरी, नीटू, आरिफ, गुरदीप, सुमित भड़ाना, अमित आदि मौजूद रहे।

इस्तीफा दें सीएम योगी
सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल, शहर विधायक रफीक अंसारी, महानगर अध्यक्ष अलीम अलवी, पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद के हस्ताक्षरों से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि उप्र की योगी सरकार ने 100 दिनों में साबित कर दिया है कि प्रदेश की जनता के साथ धोखा किया जा रहा है। 100 दिन में उप्र में दो हजार से भी अधिक हत्याएं हो गईं। लूट और अपहरण की घटनाएं भी अनगिनत हैं। किसानों के साथ कर्जमाफी के नाम पर धोखा हुआ है। योगी सरकार पूरी तरह से फेल है। नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री योगी को इस्तीफा देना चाहिए। 

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