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सीसीएसयू मेरठ में निकला कोबरा, छात्रों में हड़कंप

Mon, 21 Sep 2015 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में शनिवार को कुलपति आवास में कोबरा घुसने से हड़कंप मचा गया। पेड़ पर चढ़े कोबरा को पेड़ से उतारने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं कुछ दिन पहले इकोनॉमिक्स विभाग में भी कोबरा घुस गया था।
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस काफी हरा भरा है। घर और डिपार्टमेंट में सांप दिखना आम बात है। इन समय गर्मी ज्यादा होने के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं।

शनिवार को कुलपति आवास में एक कोबरा घुस आया और  पेड़ पर चढ़ गया। कर्मचारियों ने सांप किसी तरह पेड़ से नीचा उतारा और आवास से बाहर किया। वहीं कुछ दिन पहले ही इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में भी कोबरा घुस आया था। बॉटनी डिपार्टमेंट तो सांपों के लिए जाना जाता है। डिपार्टमेंट का अपना गार्डन है। पेड़ पौधे काफी हैं। डिपार्टमेंट की प्रोफेसर वाई विमला के मुताबिक तीन सांप अक्सर डिपार्टमेंट के आसपास दिखाई देते हैं। एक तो इतना पुराना है कि लोग उसे पहचान गए हैं। वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता। तपोवन में घना जंगल है। सांपों से डरने की जरूरत नहीं है। बस सावधानी जरूरी है।
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घोड़ा पछाड़ और कोबरा की भरमार
कैंपस में घोड़ा पछाड़ और कोबरा दो तरह के सांप ज्यादा दिखाई देते हैं। यहां की जलवायु इनको सूट करती है। मेरठ कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कपिल सिवाच के मुताबिक कैंपस में रैट स्नेक (घोड़ा पछाड़) काफी हैं। यह चूहे खाता है। कोबरा भी हैं। बारिश के मौसम में सांप बिलो में पानी भरने की वजह से बाहर निकल आते हैं। अब सांप दिखने की वजह यही है कि मौसम उनके अनुकूल है। रैट स्नेक खतरनाक नहीं है।
 
घर में निकला अजगर, कोबरा
मेरठ कॉलेज में सांख्यिकी विभाग में शिक्षक डॉ. अलका चौधरी मेडिकल कॉलेज कैंपस में रहती हैं। उनके पति डॉ. सुभाष दहिया कॉलेज में डॉक्टर हैं। हाल में उनके घर में अजगर निकल आया। सांप की फोटो खींचकर डॉ. अलका ने एक्सपर्ट को व्हाट्सएप की तो पता चला सांप अजगर है। इससे पहले इनके ही घर में कोबरा निकला था।

सांप कांटे तो बरतें सावधानी
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही के मुताबिक सांप काटने पर तुरंत चिकित्सक की मदद लेनी चाहिए। कपड़े से हल्का बंद लगा लें। बंद इतना तेज न लगाएं जिससे खून का दौड़ा रुक जाए। चिकित्सक एंटी डॉट देते हैं। जहर से नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं। ब्लीडिंग होने से मौत हो सकती है।
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