पूर्व विधायक रविंद्र पुंडीर के पीए से लेकर सरधना से सपा के टिकट तक का सफर पिंटू राणा ने देखते ही देखते तय कर लिया था। रालोद से राजनीति में कदम रखने वाले मैनपाल सिंह उर्फ पिंटू राणा समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के नाम से बनने जा रही नई पार्टी के सहयोग में सक्रिय रूप से जुटे थे। लेकिन शनिवार को लखनऊ से मेरठ के अंतिम सफर में यह हंसता चेहरा एक पल में सबका साथ छोड़ गया। परिवार में कोहराम मचा है तो जिस भी परिचित ने उनकी मौत के बारे में सुना तो वह अवाक रह गया।
पत्नी से जन्मदिन पर किया गया वादा पिंटू राणा नहीं निभा पाए। पिंटू दो दिन से लखनऊ में थे। बीते शुक्रवार ही उनकी पत्नी शशि राणा का जन्मदिन था। उन्होंने पत्नी से वादा किया था कि शुक्रवार शाम तक आ जाऊंगा। लेकिन लखनऊ में पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव से मुलाकात होने के चलते वे मेरठ नहीं आ सके थे। उन्होंने फोन पर ही पत्नी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए घर पर केक भिजवाया था। शुक्रवार रात भी शशि को फोन पर हैप्पी बर्थडे बोलते हुए कहा था कि मैं शनिवार सुबह 10 बजे तक मेरठ आ जाऊंगा। रात को हम डिनर पर चलेंगे। शनिवार सुबह पिंटू को फोन स्विच ऑफ मिलने पर शशि ने जब पिंटू के मित्र प्रदीप गर्ग की पत्नी को कॉल की तो हादसे का पता चला।
‘मेरे देवता को मत ले जाओ’
शशि पिंटू के शव पर विलाप करते हुए कह रही थीं कि माता रानी में तो तेरी सेवा में लगी रहती थी। तूने भी मेरे पति को नहीं बचाया। माता रानी तेरे लिए मैंने और उन्होंने कॉलोनी में मंदिर बनवाया और सेवा की, फिर भी मेरी जिंदगी छीन ली। शशि ने बिलखते हुए कहा कि आपने तो मुझे रानी बनाकर रखा था और जिंदगी भर साथ देने का वादा किया था। लेकिन बीच में ही छोड़ दिया। अब मैं किसके सहारा रहूंगी। मेरे देवता को मत ले जाओ।
‘नहीं दिखेगा अब वो हंसता चेहरा’
सादगी से लोगों का दिल छूने वाले पिंटू राणा की अंतिम यात्रा में हर कोई यही कहता नजर आया कि हमेशा मुस्कराने वाला चेहरा अब देखने को नहीं मिलेगा। शनिवार रात करीब आठ बजे सूरजकुंड पर पिंटू राणा का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान जितेंद्र सिंह बाजवा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह, पूर्व विधायक विनोद हरित, आसिफ सैफी फलावदा, साईम रिजवी, सपा जिलाध्यक्ष चौ. राजपाल सिंह, एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल, राजकुमार सांगवान, हाजी बाबू खा मंढियाई, पूर्व ब्लॉक प्रमुख देवेंद्र गुर्जर, समाजसेवी अनिल चौधरी, चेयरमैन पदमेंद्र सिंह, सचिन देव अहलावत प्रमुख, विधायक सोमेंद्र तोमर, विनीत अग्रवाल शारदा, मधु चौधरी, प्रदीप चौधरी, अभिषेक गुर्जर, आरती अग्रवाल, महजबी समौली, साजेब रसूलपुर, बाबर चौहान खरदौनी, जकी हसन, डॉ. आरिफ फैजी, रिहान पाबली, पप्पू गुर्जर, विनय प्रधान, योगेंद्र जाटव, गौरव शर्मा, डॉ. सतीश प्रकाश आदि मौजूद रहे। परिजनों ने बताया कि पिंटू राणा तीन भाई थे। एक भाई की पहले ही हादसे में मौत हो चुकी है। एक भाई गांव में परिवार के साथ रहता है।
जमीन से जुड़े रहे संघर्षशील पिंटू
दस वर्षों में पिंटू ने जो मुकाम हासिल किया, वह राजनीति में इतनी जल्दी नहीं मिलता है। मूल रुप से किठौर के गांव नंगली निवासी पिंटू राणा हाल में रुड़की रोड स्थित हनुमान एंकलेव कालोनी में रहते थे। कुछ दिन भाजपा में रहने के बाद वह रालोद में जयंत चौधरी के खास रहे। युवा लोकदल के जिलाध्यक्ष के तौर पर राजनीति में कदम रखा। यूपी में बसपा सरकार आने के बाद वह बसपा में शामिल हो गए। यहां भी बसपा के दिग्गज नेताओं के करीबी रहे। इसके बाद वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा की सरकार आ गई। जिसके बाद उन्होंने संयुक्त व्यापार मंडल में रहते हुए व्यापारियों के हितों की लड़ाई लड़ी। दो वर्ष पूर्व इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के सदर मौलाना तौकीर रजा के माध्यम से उन्होंने सपा में जगह बना ली। आगे बढ़े तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के करीबियों में पहचाने जाने लगे थे। जिसके चलते पिंटू को विगत विधानसभा चुनाव में सरधना विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाने की घोषणा भी हो गई थी। करीब तीन माह तक पिंटू ने सरधना में कार्य भी किया। लेकिन पार्टी की अंदरूनी कलह के कारण उनका टिकट कट गया था। शिवपाल यादव के करीबी होने के चलते ही वह समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के नाम से बनने जा रही नई पार्टी की तैयारियों में जुटे थे। इसकी शुरुआत भी 22 जून को मेरठ में एक कार्यक्रम के जरिये की थी। पिंटू ने इसमें घोषणा की थी कि पार्टी बनने के बाद जुलाई माह में इसका सबसे बड़ा कार्यक्रम मेरठ में होगा। पिंटू राणा की पारिवारिक स्थिति बेहद कमजोर रही है। परिवार में भी कोई राजनीति में नहीं था। लेकिन उसके बाद भी वे राजनीति में आगे बढ़ते गए।
हादसे ने परिवार को झकझोरा
पिंटू की मौत की सूचना मिलने पर परिवार के लोगों में कोहराम मच गया। पिंटू की पत्नी शशि राणा, बड़े बेटे अन्नत (12) और छोटे बेटे अर्चित बिलख पड़े। उनके घर पर रिश्तेदारों, परिचितों और राजनीति से जुड़े लोगों का तांता लगना शुरू हो गया। हालांकि शशि सूचना मिलते ही बेटों के साथ तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गई थीं। घर पर शशि की बड़ी बहन कमलेश और उनका भांजा अनु मौजूद रहे। जो परिवार के सदस्यों के साथ रोते-बिलखते हुए नजर आए। इस दौरान रालोद के जिलाध्यक्ष राहुल देव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष सीमा प्रधान, पूर्व विधायक चंद्रवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, चैतन्य देव स्वामी, संजय गुप्ता, ठाकुर लाखन सिंह, चेयरमैन पदमेंद्र सिंह, बसपा नेता सचिन कौशिक, आसिफ सैफी फलावदा, पवन गुर्जर, अभिषेक गुर्जर, ब्लॉक प्रमुख सचिन अहलावत, पूर्व ब्लॉक प्रमुख देवेंद्र गुर्जर, रालोद नेता राजकुमार सांगवान, सोनू त्यागी समेत विभिन्न लोग उनके आवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की।
पिंटू की गाड़ी से उतर गये थे अभिषेक
पिंटू के दोस्त अभिषेक सिंह ने सूरजकुंड पर बताया कि दो दिन पहले जब पिंटू राणा लखनऊ जा रहे थे तो वह भी उनकी गाड़ी में बैठे थे। लेकिन बाद में वह गाड़ी से उतर गए और कहा कि उनका मन नहीं कर रहा, अबकी बार साथ चलेंगे। भावुक होकर कहा कि उन्हें नहीं पता था कि पिंटू लखनऊ कभी नहीं आएंगे।
मौत की सूचना के बावजूद सपाइयों ने काटा केक
लंबे समय तक सपा से जुड़े रहे पिंटू राणा की मौत की खबर मिलने के बावजूद सपाइयों ने पार्टी कार्यालय पर केक काटकर अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाया। शनिवार को यह सोशल साइट्स (व्हाट्स एप, फेसबुक) पर वायरल हो गया। इस संबंध में सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि पिंटू राणा की हादसे में मृत्यु का दुख है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत पार्टी के सदस्यों ने केक काटकर पूर्व सीएम अखिलेश यादव की लंबी उम्र की कामना की है और रक्तदान शिविर लगाया गया। लेकिन कोई जश्न का आयोजन नहीं किया है। उन्होंने बताया कि वे और कई अन्य सपा नेता उनके यहां शोक संवेदना व्यक्त करने भी गए थे।
इसी माह होना था बड़ा कार्यक्रम
पिंटू राणा को पिछली बार सरधना विधानसभा से सपा के टिकट में चुनाव लड़ने की घोषणा भी हो गई थी। मगर बाद पार्टी की अंदरूनी कलह के कारण पार्टी से उनका टिकट कट गया था। वह शिवपाल यादव के करीबी थे और समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के नाम से नई पार्टी बनाने की तैयारी में जुटे थे। इसकी शुरुआत भी 22 जून को मेरठ में एक कार्यक्रम के जरिए की थी। पिंटू राणा ने इसमें घोषणा की थी कि पार्टी बनने के बाद जुलाई माह में इसका सबसे बड़ा कार्यक्रम मेरठ में होगा।