स्मार्ट सिटी पर मेरठ के साथ राजनीति हो रही है। मेरठ में सर्वे हुआ और लोगों ने यहां जमकर वोट की, वहीं रायबरेली में ऐसा कुछ नहीं हुआ। बावजूद मेरठ और रायबरेली को एक ही कैटेगरी में रखा गया है। माना जा रहा है कि सोमवार को केंद्र सरकार नए शामिल शहरों की सूची जारी करेगी। उधर, मेरठ मेट्रो के प्रस्तावित प्रोजेक्ट की स्पीड भी धीमी हो रही है। संभावना है कि कानपुर में सीएम अखिलेश यादव चार अक्टूबर को मेट्रो परियोजना का शिलान्यास कर रहे हैं तो वहीं मेरठ के लिए निराशा इस बात की है कि यहां की डीपीआर पर अभी कैबिनेट ने विचार ही नहीं किया है।
500 पेज का है प्रपोजल
निगम प्रशासन और कंसलटेंट कंपनी ने जून 2016 में स्मार्ट सिटी का फाइनल प्रपोजल 500 पेज में तैयार किया। शहर की जनता ने भी जमकर वोटिंग की। 30 जून को प्रपोजल केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्वीकार भी कर लिया। अब आगामी सोमवार को मेरठ के साथ धोखा हुआ तो साफ है कि मेरठ के साथ खेल किया गया।
वीसी भेजेेंगे शासन को पत्र
एमडीए वीसी योगेंद्र यादव सोमवार को प्रदेश सरकार को पत्र लिखेंगे। उन्होंने मेट्रो की डीपीआर बनाने वाली संस्था राइट्स के अफसरों से इस बाबत लखनऊ में एलएमआरसी के एमडीए कुमार केशव से बात करने को कहा है। वह भी सीएम को पत्र लिखेंगे, ताकि प्रस्ताव कैबिनेट में पास हो जाए।