स्मार्ट सिटी प्रपोजल को मजबूती देेने का काम शुरू हो गया है। नगर निगम में ही अमृत योजना के कार्यालय में स्मार्ट सिटी का कार्यालय भी खोल दिया गया है। शहर में विकास कार्य करने वाले सभी विभागों से एक सप्ताह में डाटा देने को कहा गया है।
मेरठ को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल कराने के लिए नगर निगम प्रशासन और कंसलटेंट ने फिर से कवायद शुरू कर दी है। पूर्व में यूपी और केंद्र सरकार के सामने प्रस्तुत किए गए प्रपोजल को अपडेट किया जा रहा है। वहीं, अमृत योजना के कार्यालय में ही कंसलटेंट और अन्य अधिकारियों ने काम शुरू कर दिया है। नगर निगम प्रशासन ने कंसलटेंट से उन मुख्य शहरों का प्रपोजल भी मंगवाया है जो अब से पहले स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल हो गए हैं। ताकी उसी के आधार पर मजबूत प्रपोजल तैयार हो सके। 15 दिन के भीतर यानी मतदान के तत्काल बाद स्मार्ट सिटी का नया प्रपोजल लखनऊ में स्मार्ट सिटी सेल के सामने पेश किया जाएगा। इसलिए कंसलटेंट टीम ने सभी विभागों से डाटा मांगा है। हालांकि यह देखना है कि विभागीय अधिकारी कंसलटेंट टीम का कितना सहयोग करेंगे।
दो विभागों का बड़ा रोल
मेरठ। शहर के विकास में नगर निगम ही नहीं, एमडीए और आवास विकास परिषद का बड़ा रोल है। शहर की सड़कों से लेकर पार्क आदि विकसित करने और एलईडी लाइटें लगाने में दोनों विभाग अहम भूमिका निभाते हैं। इतना ही नहीं कम्यूनिटी सेंटर बनाने, चौराहों को सजाने, सीवर लाइन का काम भी इन दोनों विभागों द्वारा किया जाता रहा है। स्मार्ट सिटी के प्रपोजल में दोनों विभागों द्वारा कराए गए कार्यों की अहम भूमिका रहेगी। क्योंकि एक तरफ पुराने शहर में भारत सरकार की जेएनएनयूआरएम और अमृत योजना से सीवर और पानी की पाइप लाइन डाली जा रही है। वहीं, पार्क भी विकसित किए जा रहे हैं। जबकि एमडीए और आवास विकास परिषद अपनी कॉलोनियों को विकसित करते समय ही पार्क, कम्यूनिटी सेंटर, सीवर लाइन, पार्क आदि की सुविधा देते हैं।