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स्मार्ट सिटी चाहिए तो अफसर दिखाएं स्मार्टनेस

Thu, 26 May 2016 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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स्मार्ट सिटी की मांग - फोटो : अमर उजाला
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 स्मार्ट सिटी के हकदार मेरठ को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने एक बार फिर दौड़ में शामिल कर लिया है। करीब एक साल के अंतराल में हालात स्मार्ट सिटी की हकीकत के करीब हैं। ऐसे में चुनौती अपने प्रेजेंटेशन और प्रदर्शन को सुधारने की है। सीधी बात यही है कि यदि स्मार्ट सिटी चाहिए तो अफसरों को स्मार्टनेस दिखानी होगी। अफसर कह रहे हैं कि शासन का पत्र मिलने के बाद तैयारियां शुरू होंगी, लेकिन अब इतना समय नहीं है। इस इंतजार को छोड़ तैयारियों में जुट जाना होगा।
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पिछले साल जुलाई माह से मेरठ की जनता स्मार्ट सिटी का सपना देख रही है। नगर निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण लखनऊ में पिछले साल हुई प्रजेंटेशन में शहरवासियों को झटका लगा था। स्मार्ट सिटी मिशन के 15 बिंदुओं पर निगम प्रशासन प्रजेंटेशन देने में भी कामयाब नहीं हो सका था। यही नहीं, जलकल विभाग ने आय और व्यय का ब्यौरा तक ठीक से प्रस्तुत नहीं किया था। आंकड़ेबाजी के खेल में निगम प्रशासन फेल हो गया था। अब केंद्र सरकार ने एक बार फिर नगर निगम प्रशासन को प्रजेंटेशन का अवसर दिया है। 30 जून तक नगर निगम मेरठ को फिर से मूल्यांकन में शामिल होने के लिए प्रस्ताव तैयार करने होंगे।
सरकार ने मेरठ को जो यह अवसर दिया है, उसका भरपूर लाभ उठाने की जरूरत है। नगर निगम प्रशासन को पूर्व की भांति ढुलमुल रवैया छोड़कर होमवर्क में जुटना होगा। विडंबना यह है कि दो दिन बाद भी नगर निगम प्रशासन ने स्मार्ट सिटी के बिंदुओं पर काम शुरू करना तो दूर, फाइलों को भी नहीं खंगाला है। जो पुरानी गलतियों को दोहराने जैसा लग रहा है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन को अपनी मंशा साफ करते हुए खुद को बेहतर साबित करना होगा।   
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निकाल फेंकों इस फांस को
मेरठ। पिछले साल 29 जुलाई को लखनऊ में स्मार्ट सिटी के 15 बिंदुओं पर प्रजेंटेशन बैठक में नगर निगम की तरफ से पूर्व नगरायुक्त एसके दूबे ने रिपोर्ट समिति के सामने प्रस्तुत की थी। बैठक के बाद सामने आया था कि निगम अधिकारी प्रत्येक बिंदु पर न तो दमदारी से अपनी बात कह पाए थे और न ही इनके आंकड़े मजबूत थे। अधिकारियों ने बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करने में भी लापरवाही बरती थी। जिसका खुलासा उसके बाद हुई दूसरी बैठक के दौरान हो गया था। इस फांस की अकड़ मजबूत आंकड़े और दमदार प्रजेंटेशन से ही निकल सकती है। निगम प्रशासन को चाहिए कि स्मार्ट सिटी के बिंदुओं पर अपने आंकड़ों को दुरुस्त कर ले।

मेरठ को भुलाया तो पड़ेगा भारी
मेरठ। केंद्र की भाजपा सरकार हो या फिर उप्र की सपा सरकार। अगर किसी भी पार्टी ने मेरठ को स्मार्ट सिटी बनने में अड़ंगा लगाया तो आगामी विधानसभा चुनाव में शहर की जनता इसका बदल लेगी। दोनों ही सरकारों के लिए स्मार्ट सिटी का मुद्दा गले की फांस बन जाएगा। क्योंकि क्रांतिधरा मेरठ को दरकिनार करना इतना आसान भी नहीं है।
खुद अपडेट कराऊंगा फाइल : महापौर
महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि प्रतिदिन नगर निगम स्थित अपने कार्यालय में बैठकर स्मार्ट सिटी के एक-एक बिंदू की समीक्षा करूंगा। क्योंकि पिछले साल जुलाई से अब तक निगम में एतिहासिक कार्य हुए हैं। जिसमें मेरठ को 15 से अधिक अंक मिलने चाहिए। इस बार स्मार्ट सिटी की फाइल को स्वयं अपडेट कराऊंगा। जरूरत पड़ी तो 30 जून से पहले केंद्रीय शहरी विकास मंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे।

हर जन की पुकार, स्मार्ट सिटी हमारा अधिकार   
कोशिश संस्था ने किया बच्चा पार्क पर प्रदर्शन
मेरठ। स्मार्ट सिटी को लेकर एक बार फिर शहर की जनता ने आंदोलन की राह पकड़ ली है। बुधवार को कोशिश सामाजिक संगठन के सदस्यों ने बच्चा पार्क पर प्रदर्शन करके सरकारों को जगाने का काम किया। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू को पत्र भेजकर मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने की मांग की है।
संस्था के अध्यक्ष अजय सेठी ने कहा कि मेरठ क्रांतिकारी धरा है। दिल्ली के नजदीक है। स्मार्ट सिटी मेरठ का अधिकार है। एतिहासिक रूप से मेरठ की पहचान 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से होती है। जिस क्रांति ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया था। मेरठ में चिकित्सा, शिक्षा, अन्य सुविधा यूपी के अन्य बड़े शहरों से कहीं अच्छी हैं। मेरठ दिल्ली एनसीआर का शहर है। इस दौरान मनमोहन भल्ला, एसएस छाबड़ा, अनूप रस्तोगी, रीना पटेल, उमेश चंद्र जैन, मुकेश जैन, गुरदीप आहुजा, जगमोहन आहुजा, अमीर, फुरकान, महेंद्र पाल गुप्ता, मोनू अग्रवाल मौजूद रहे।

विकास पथ पर हम रायबरेली से 10 कदम आगे  
 स्मार्ट सिटी बनने की राह पर फिर एक बार मेरठ चला है। साथ में रायबरेली भी उसी ट्रैक पर है। सही बात यह है कि मेरठ का दावा रायबरेली से कहीं ज्यादा मजबूत है। एनसीआर का अहम शहर मेरठ विभिन्न ऐसे बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जो अपने आप में महत्वपूर्ण ही नहीं बल्कि प्रदेश के बड़े शहरों से मेरठ को ऊपर रखते हैं। मेरठ जहां राजस्व अदा करने के मामले में अव्वल है तो वहीं विकास की राह पर बेहद सधे कदमों से आगे बढ़ रहा है। यहां कई प्रोजेक्ट तो ऐसे हैं जो यूपी के केवल चुने शहरों में ही चल रहे हैं।

मेट्रो ट्रेन
मेट्रो ट्रेन का प्रस्ताव सूबे के केवल लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ तथा वाराणसी में ही चल रहा है। लखनऊ  में तो काम भी शुरू हो चुका है तो मेरठ में डीपीआर बन चुकी है। ऐेसे में जिस शहर में मेट्रो जैसी सुविधा जनता को मिलने जा रही हो तो उसका दावा स्मार्ट सिटी के लिए मजबूत साबित होता है। प्रदेश सरकार का दावा है कि वर्ष 2022 तक यहां मेट्रो ट्रेन फर्राटा भरेगी।  

रैपिड ट्रेन
दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भी है। केंद्र सरकार तो इस प्रस्ताव की राह इस कदर बना रही है कि एनएच-58 तक का राष्ट्रीय दर्जा खत्म कर चुकी है। क्योंकि एनएच-58 के ऊपर ही ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है तो इस बाबत यह काम किया गया है। मेट्रो और रैपिड को कनेक्ट करने का प्लान है। इस प्लान पर पूरा एनसीआर बोर्ड काम कर रहा है।

डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर
मेरठ से होकर डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर प्रस्तावित है। जमीन का अधिग्रहण इसके लिए किया जा रहा है। इससे मेरठ देश के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों से कनेक्ट हो रहा है। इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना है और मेरठ को इसमें शामिल किया गया है।

आईटी पार्क
मेरठ में आईटी पार्क बनाया जा रहा है। देश भर की बड़ी आईटी कंपनियाें को यहां अपने सेंटर खोलने का न्यौता दिया जाएगा। इससे यहां का युवा यहीं से अपने बेहतर कॅरियर की शुरुआत कर सकेगा। पहले ही साल सात हजार युवाओं को इसका लाभ होने की बात कही जा रही है। इसकी बाउंड्री का काम पूरा हो चुका है तथा इसी सप्ताह एमओयू भी साइन होने जा रहा है। बीस करोड़ की लागत से इस पर काम होगा।

हम में है दस का दम
मेरठ के सामने रायबरेली किसी भी स्तर पर नहीं ठहरता है। तुलना करें तो यह बात साफ हो जाती है कि मेरठ का दावा ही मजबूत है।
1 - मेरठ नगर निगम है जबकि रायबरेली केवल नगर पालिका है
2 - मेरठ एनसीआर का सबसे बड़ा शहर है, जबकि रायबरेली छोटा शहर ही नहीं बल्कि एनसीआर की सीमा को भी नहीं छू रहा है।
3 - मेरठ मंडल है, जबकि रायबरेली जिला है। जिसकी आबादी भी मेरठ से काफी कम है।  
4- विकास और राजनीति दोनों के लिहाज से मेरठ को पश्चिम उप्र की राजधानी के नाम से भी जाना जाता है।
5 - मेरठ नगर निगम के पास सफाई, पानी और निर्माण के संसाधनों की भरमार है, जबकि रायबरेली के पास नगर पालिका स्तर के ही संसाधन हैं
6 - 1857 की क्रांति में मेरठ इतिहास के पन्नों में दर्ज है
7 - मेरठ एजुकेशनल हब है। यहां दो सरकारी और दो प्राइवेट विवि हैं। एक सरकारी और एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, 60 से अधिक व्यावसायिक शिक्षण संस्थान हैं।
8 - मेरठ शहर में स्मार्ट सिटी मिशन के बिंदु ग्रीन बेल्ट के लिए भूमि उपलब्ध है
9 - मेरठ में मेट्रो ट्रेन का कार्य शुरू हो चुका है
10 - मेरठ में जेएनएनयूआरएम बाद में अटल मिशन योजना संचालित है

एमडीए भी देगा नगर निगम का सहयोग
मेरठ। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण सहयोग करेगा। प्रदेश स्तरीय एक कमेटी चाइना से हाल ही में स्मार्ट शहरों को देखकर लौटी है जो अपने यहां इसी तरह से वर्क करेगी। वीसी एमडीए राजेश कुमार उस टीम का हिस्सा थे। प्राधिकरण खासतौर से नालों का प्रबंधन, जल निकासी, सड़क आदि पर काम करेगा। चौराहों का सौंदर्यीकरण तथा सुचारु यातायात प्लान का हिस्सा है। वेस्ट मैनेजमेंट पर सामूहिक प्रयास करने की बात कही जा रही है। वीसी के मुताबिक इस बाबत जल्द ही निगम अधिकारियों के साथ बैठक कर तय किया जाएगा कि प्लान को कैसे अमलीजामा पहनाया जाए।
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