अपने शहर का नाम स्मार्ट सिटी में शामिल होने का सपना एक बार फिर टूट सकता है। पिछली बार गच्चा खाने के बावजूद स्मार्ट शहरों की अंतिम सूची में शामिल होने से पहले ही व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। एक मार्च को शुरू होेने वाली संभावित वोटिंग अब टल गई है। यही नहीं स्मार्ट सिटी का प्रपोजल तैयार करने का दावा कर रहे कंसलटेंट ने अभी मेरठ का रुख ही नहीं किया है। वह गुजरात में बैठकर ही निगरानी की बात कह रहे हैं। यह हाल तब है जबकि रीजनल सेंटर फॉर अरबन एंड एन्वायरमेंट स्टडीज के अधिकारियों ने 30 मार्च को प्रपोजल केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए हैं। वोटिंग की व्यवस्था की तैयारी पुख्ता न होने और कंसलटेंट की बेरुखी से स्मार्ट सिटी के दावे को झटका लग सकता है।
पहले भी हो चुका खिलवाड़
क्रांतिकारी धरा की जनता ने पिछले साल स्मार्ट सिटी के लिए बंपर वोटिंग की थी। मेरठ 2015 से स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। 29 जुलाई 2015 को पहली बार लखनऊ में प्रजेंटेशन हुआ था। जिसमें मेरठ सहित उप्र के 14 नगर निगम, 48 नगर पालिकाओं के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। स्मार्ट सिटी के बिंदुओं पर नगर निगम मेरठ काफी हद तक खरा उतरा था। जिसके आधार पर शासन की जारी विज्ञप्ति में मेरठ को 75 अंक देकर 13वें स्थान पर रखा था। लेकिन रातोंरात स्मार्ट सिटी की सूची से छेड़छाड़ कर रायबरेली के अंक भी 75 दर्शाकर मेरठ से पहले रायबरेली को 13 ए और मेरठ को 13 बी स्थान दे दिया था। इसका खामियाजा मेरठ आज तक भरता चला आ रहा है। अब मेरठ के लिए अंतिम मौका है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार शीघ्र ही स्मार्ट सिटी के नामों की नई सूची जारी करने की तैयारी में है।
लखनऊ में हो चुकी बैठक
स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल शहरों के अफसरों की बीती 28 जनवरी को लखनऊ में बैठक हुई थी। इसमेें मेरठ से स्मार्ट सिटी सेल के कोऑर्डिनेटर एवं अधिशासी अभियंता मोइनुद्दीन और कंसलटेंट बीके पटेल ने भाग लिया था। कंसलटेंट को निर्देश दिए गए थे कि वह 25 मार्च से पहले प्रपोजल तैयार कर चेक कराएंगे। ताकि 30 मार्च को केंद्र सरकार के सामने भेजा जाने वाला प्रपोजल मजबूत हो और घोषित होने वाले शहरों में मेरठ का नाम आ सके।
कोई गंभीर नहीं, जनप्रतिनिधि भी सोए
स्मार्ट सिटी को लेकर कंसलटेंट और नगर निगम प्रशासन कोई गंभीर नहीं है। जनवरी में कंसलटेंट टीम के दो-तीन सदस्य निगम में दिखाई दिए थे। लेकिन कंसलटेंट मेरठ ही नहीं आए। निगम अधिकारियों में भी कोई खास हलचल नहीं दिखाई दे रही है। जनप्रतिनिधि इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्मार्ट सिटी का कितना मजबूत प्रपोजल बन रहा है। अभी तक कोई खास तैयारी नहीं हैं।
फिर से वोटिंग कराने की तैयारी
रीजनल सेंटर फॉर अरबन एंड एन्वायरमेंट स्टडीज की तरफ से आए निर्देश में स्पष्ट है कि स्मार्ट सिटी के लिए फिर से वोटिंग होगी। वोटिंग का समय भी लगातार 15 दिन रखा गया है। शहर की जनता को माय जीओवी डॉट इन पर वोटिंग करनी होगी। हालांकि अभी निगम प्रशासन की तरफ से वोटिंग के लिए कोई अनुमति नहीं मिली है। निगम सूत्रों की मानें तो एक मार्च से 15 मार्च तक वोटिंग की तैयारी थी। लेकिन अब 5 से 20 मार्च तक वोटिंग हो सकती है। जिसके लिए शहर की जनता को तैयार रहना होगा।
कब तक होती रहेगी बंदरबांट
स्मार्ट सिटी प्रपोजल में मेरठ को सफलता भले ही नहीं मिल सकती हो। लेकिन धन की बंदरबांट जरूर होती रही। लाखों रुपये कंसलटेंट, वोटिंग व्यवस्था पर खर्च हुए। इस बार भी ठीक पहले जैसे संकेत नजर आ रहे हैं। सरकारी धन की बंदरबांट का खाका तो तैयार हो रहा है। लेकिन मजबूत प्रपोजल बनाने की कोई तैयारी नहीं है।
तो बदलवाएंगे कंसलटेंट
कंसलटेंट की तरफ से लापरवाही होती है तो भारत सरकार को पत्र लिखकर कंसलटेंट बदलने की मांग करेंगे। स्मार्ट सिटी प्रपोजल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। -हरिकांत अहलुवालिया, महापौर
हम निगरानी कर रहे
स्मार्ट सिटी का प्रपोजल तैयार हो रहा है। कंसलटेंट तो अभी मेरठ नहीं आए हैं। लेकिन उनकी टीम के सदस्य कार्य कर रहे हैं। हम निगरानी कर रहे हैं। शीघ्र ही वोटिंग भी शुरू होगी। -मोइनुद्दीन, कोऑर्डिनेटर स्मार्ट सिटी सेल